केंद्रीय बल के ठहरने से मालदा का स्कूल महीनों से बंद, पढ़ाई और परीक्षा पर असर

Malda Santa Debya High School closed central forces: मालदा के इंग्लिश बाजार स्थित शांतादेब्या हाईस्कूल में केंद्रीय बल के ठहरने के कारण सामान्य पढ़ाई बंद है। स्कूल में साढ़े आठ सौ से अधिक छात्र-छात्राएं हैं। अगस्त में दूसरी सेमेस्टर की परीक्षा भी नहीं हो सकी। स्कूल प्रबंधन ने प्रशासन से बल को दूसरी जगह भेजने की मांग की है। पुलिस अधीक्षक ने जल्द व्यवस्था का भरोसा दिया है।
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केंद्रीय बल के ठहरने से स्कूल की पढ़ाई और परीक्षा प्रभावित
Malda Santa Debya High School closed central forces: मालदा के इंग्लिश बाजार स्थित शांता देब्या हाईस्कूल में करीब चार महीने से पढ़ाई पूरी तरह ठप है। वजह है स्कूल परिसर में डटा केंद्रीय बल। विधानसभा चुनाव खत्म हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन बल अब तक नहीं हटा है।
जानकारी के मुताबिक, मालदा में 23 अप्रैल को विधानसभा चुनाव हुआ था। इससे पहले 14 अप्रैल को पहली बार केंद्रीय बल स्कूल में पहुंचा था। चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के बाद गर्मी की छुट्टियों में बल कुछ दिनों के लिए हटा और 1 जून को स्कूल फिर खुला। लेकिन 13 जून को एक कंपनी केंद्रीय बल दोबारा स्कूल में लाकर रखा गया, जो अब तक वहीं डेरा डाले हुए है।
अगस्त के पहले सप्ताह में राज्य के सभी स्कूलों में द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा हुई, लेकिन बल की मौजूदगी के कारण इस स्कूल में परीक्षा नहीं हो सकी। परीक्षा की तैयारी के लिए पढ़ाई तक शुरू नहीं हो पाई, जिससे छात्र-छात्राएं भारी परेशानी में हैं।




बल को दूसरी जगह भेजकर जल्द स्कूल खोलने की मांग
स्कूल में साढ़े आठ सौ से अधिक छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। यहां 17 शिक्षक, दो पार्श्व शिक्षक और तीन अशिक्षक कर्मचारी कार्यरत हैं। अधिकतर छात्र मध्यमवर्गीय परिवारों से आते हैं, जिनके लिए स्कूल बंद रहने पर निजी ट्यूशन भी आसान नहीं।
स्कूल प्रबंधन ने बल हटाने की मांग को लेकर जिलाशासक, पुलिस अधीक्षक और जिला शिक्षा विभाग को पत्र लिखा है। भारप्राप्त प्रधान शिक्षक मनोज मंडल ने कहा, “हम चाहते हैं कि जितनी जल्दी हो सके स्कूल खोला जाए।” उन्होंने बताया कि इतना समय बर्बाद हो चुका है कि सिलेबस पूरा करना मुश्किल हो गया है।
मालदा के पुलिस अधीक्षक अनुपम सिंह ने भी समस्या स्वीकार की। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही वैकल्पिक जगह तलाशकर स्कूल से बल को हटाया जाएगा।
फिलहाल छात्र, अभिभावक और शिक्षक प्रशासन के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं।



रिपोर्ट: एकबाल, पश्चिम बंगाल

