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ममता बनर्जी को हाई कोर्ट से झटका! बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी बने रहेंगे नेता प्रतिपक्ष

ममता बनर्जी को हाई कोर्ट से झटका! बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी बने रहेंगे नेता प्रतिपक्ष
ममता बनर्जी को हाई कोर्ट से झटका! ऋतब्रत बनर्जी बने रहेंगे नेता प्रतिपक्ष (File Photo)

पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इससे ममता बनर्जी गुट को झटका लगा है, जबकि ऋतब्रत बनर्जी फिलहाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बने रहेंगे।

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Dipali Kumari
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West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी को कलकत्ता हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाई कोर्ट ने आज गुरुवार को उस याचिका पर अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया, जिसमें विधानसभा स्पीकर द्वारा बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दिए जाने के फैसले को चुनौती दी गई थी। अदालत के इस फैसले के बाद फिलहाल स्पीकर का निर्णय प्रभावी रहेगा और ऋतब्रत बनर्जी नेता प्रतिपक्ष के पद पर बने रहेंगे।

मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति कृष्णा राव की एकल पीठ में हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने किसी भी प्रकार का अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया और दोनों पक्षों को अपने-अपने हलफनामे दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है, जबकि याचिकाकर्ता पक्ष को उसके बाद दो सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करना होगा। मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को निर्धारित की गई है।

क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, यह विवाद टीएमसी के भीतर चल रहे राजनीतिक मतभेदों से जुड़ा हुआ है। पार्टी से निष्कासित किए जा चुके विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए दावा किया था कि उन्हें टीएमसी के 58 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने एक अलग गुट का गठन किया, जो ममता बनर्जी को नेता तो मानता है, लेकिन पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की भूमिका और अधिकारों को स्वीकार नहीं करता।

राजनीतिक विवाद तब और बढ़ गया जब पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर रथेंद्र बोस ने बागी गुट के दावे को स्वीकार करते हुए ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दे दी। इसके साथ ही ममता बनर्जी के समर्थक और आधिकारिक उम्मीदवार शोभनदेव चट्टोपाध्याय को इस पद से बाहर कर दिया गया।

ममता बनर्जी ने किया अदालत का रुख

स्पीकर के इसी फैसले के खिलाफ ममता बनर्जी खेमे ने कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिका में कहा गया था कि स्पीकर का निर्णय मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल की आधिकारिक स्थिति की अनदेखी करता है और यह संसदीय परंपराओं तथा संवैधानिक सिद्धांतों के विपरीत है।

हालांकि, हाई कोर्ट ने फिलहाल इस फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। ऐसे में जब तक अदालत इस मामले में अंतिम फैसला नहीं सुनाती, तब तक ऋतब्रत  पश्चिम बंगाल विधानसभा में मान्यता प्राप्त नेता प्रतिपक्ष बने रहेंगे। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और आने वाले दिनों में टीएमसी के भीतर सियासी संघर्ष और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।