West Bengal Fire: बारासात मेडिकल कॉलेज के गर्ल्स हॉस्टल में शार्ट सर्किट से लगी आग, मची अफरा-तफरी

West Bengal Fire: बारासात मेडिकल कॉलेज के गर्ल्स हॉस्टल में शॉर्ट सर्किट से लगी आग, बड़ा हादसा टला। दमकल और छात्राओं की सूझबूझ से पाया गया काबू कोई हताहत नहीं।
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सतर्कता से बची कई जानें
West Bengal Fire: उत्तर 24 परगना जिले के बारासात मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल परिसर से सटे एनटीएस बिल्डिंग के गर्ल्स हॉस्टल में गुरुवार सुबह एक बड़ी दुर्घटना टल गई। हॉस्टल के एक कमरे में अचानक आग लगने से पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई। गनीमत यह रही कि समय रहते सतर्कता बरती गई, जिससे एक बड़ा हादसा होने से बच गया और किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की खबर सामने नहीं आई है।
कैसे मची अफरा-तफरी और हुआ बचाव
प्राप्त जानकारी के अनुसार गुरुवार की सुबह जब हॉस्टल की छात्राएं अपने कमरों में थीं तभी अचानक एक कमरे से धुआं और लपटें निकलते दिखाई दीं। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण करना शुरू कर दिया जिससे वहां मौजूद छात्राओं में चीख-पुकार मच गई और वे तुरंत अपनी जान बचाने के लिए कमरों से बाहर सुरक्षित स्थान की ओर भागीं।
मौके पर पहुंची दमकल विभाग
घटना की गंभीरता को देखते हुए तुरंत अस्पताल प्रशासन और दमकल विभाग को इसकी सूचना दी गई। सूचना मिलते ही दमकल की एक गाड़ी तुरंत मौके पर पहुंच गई। अस्पताल के कर्मचारियों, प्रशासनिक अधिकारियों और हॉस्टल की छात्राओं की सूझबूझ और तत्परता के कारण मात्र 10 से 15 मिनट के भीतर ही आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। यदि जरा भी देर होती, तो यह आग आसपास के अन्य कमरों तक फैल सकती थी और स्थिति बेहद भयावह हो सकती थी।
शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट आया सामने
बारासात मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की डिप्टी सुपरिंटेंडेंट निवेदिता मिश्रा ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड और इलेक्ट्रिकल टीम को तुरंत सक्रिय कर दिया गया था। दमकल विभाग के सूत्रों के अनुसार, आग की इस घटना में प्रभावित कमरे के अंदर रखे हुए तमाम जरूरी कागजात, कपड़े और लकड़ी के फर्नीचर जलकर पूरी तरह खाक हो गए हैं।
हॉस्टल सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घटना के बाद एक बार फिर शैक्षणिक संस्थानों और हॉस्टलों के कमरों में बिजली की सुरक्षा और वायरिंग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अभिभावकों और छात्राओं ने मांग की है कि ऐसे परिसरों में नियमित रूप से बिजली के उपकरणों और वायरिंग की जांच कराई जानी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की खतरनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
रिपोर्ट: शिंकी सिंह, कोलकाता

