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डूब सकते हैं कोलकाता और मुंबई, डेढ़ करोड़ लोगों पर मंडराया बेघर होने का खतरा

डूब सकते हैं कोलकाता और मुंबई, डेढ़ करोड़ लोगों पर मंडराया बेघर होने का खतरा
UN Report Sea Level Rise Kolkata Mumbai: संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में चेतावनी कोलकाता और मुंबई में करोड़ों लोगों के घर डूबने का खतरा जानें रिपोर्ट में क्या कहा गया है।(File Photo)

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में चेतावनी कोलकाता और मुंबई में करोड़ों लोगों के घर डूबने का खतरा जानें रिपोर्ट में क्या कहा गया है।

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Shinki Singh
Shinki Singh
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यूएन की डराने वाली रिपोर्ट

समुद्र का बढ़ता जलस्तर अब भविष्य की कोई दूर की चेतावनी नहीं बल्कि वर्तमान का एक भयावह सच बन चुका है। संयुक्त राष्ट्र (UN) की हालिया रिपोर्ट में इस विषय पर अत्यधिक गंभीर चिंता जताते हुए कहा गया है कि दुनिया के कई बड़े महानगर आने वाले समय में स्थायी रूप से जलमग्न हो सकते हैं। इस रिपोर्ट में भारत के दो प्रमुख महानगरों कोलकाता और मुंबई का नाम प्रमुखता से शामिल किया गया है।

करोड़ों लोगों के घर डूबने का तत्काल खतरा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की इस रिपोर्ट के अनुसार कोलकाता और मुंबई में लाखों-करोड़ों लोग अपने घर खोने के “तत्काल खतरे” में हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, दक्षिण एशिया के निचले डेल्टा क्षेत्रों में, भारत के कोलकाता और मुंबई जैसे शहरों और बांग्लादेश के ढाका में इसका सबसे बड़ा असर मानव विस्थापन के रूप में दिखेगा जहां 1 करोड़ 40 लाख से ज्यादा लोगों के घर स्थायी रूप से डूबने का खतरा तत्काल मंडरा रहा है।

2024 में दर्ज हुई सबसे तेज़ बढ़ोतरी

रिपोर्ट के मुताबिक 2024 में समुद्र के जलस्तर में अब तक की सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो करीब 6 मिलीमीटर रही। यह बढ़ोतरी ग्लेशियर पिघलने और समुद्र के गर्म होने की वजह से हो रही है।

शहरी ढांचे और जल आपूर्ति पर पहले से पड़ रहा असर

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि समुद्र का बढ़ता जलस्तर पहले से ही शहरी ढांचे, जल आपूर्ति व्यवस्था, परिवहन नेटवर्क, ऊर्जा ग्रिड, इमारतों और भूजल संसाधनों को नुकसान पहुंचा रहा है, जिसके दूरगामी परिणाम मानवाधिकारों और दीर्घकालिक विकास पर पड़ सकते हैं।

दुनिया की 10% आबादी खतरे में

वैश्विक स्तर पर, रिपोर्ट के अनुसार करीब 77 करोड़ लोग, यानी दुनिया की करीब 10 प्रतिशत आबादी समुद्र तट से 5 मीटर से कम ऊंचाई वाले तटीय इलाकों में रहती है, जिससे वे गंभीर खतरे में हैं।

दीर्घकालिक योजना बनाना जरूरी: रिपोर्ट

रिपोर्ट में इस स्थिति के लिए कोई निश्चित समय-सीमा तो नहीं बताई गई, लेकिन यह जरूर कहा गया है कि समुद्र के बढ़ते जलस्तर का खतरा अपरिवर्तनीय है और इसकी धीमी लेकिन लगातार प्रकृति को देखते हुए जल्द से जल्द दीर्घकालिक अनुकूलन योजना बनाना बेहद जरूरी है।


रिपोर्ट: शिंकी सिंह, कोलकाता

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शिंकी सिंह (Shinki Singh) पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग एक दशक का अनुभव रखती हैं। उन्होंने वर्ष 2017 में दैनिक सन्मार्ग से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जहाँ कई वर्षों तक फील्ड रिपोर्टिंग और न्यूज़ डेस्क की जिम्मेदारियाँ निभाईं। इस दौरान उन्होंने राजनीति, सामाजिक सरोकारों, महिला मुद्दों और जनहित से जुड़े विषयों पर व्यापक रिपोर्टिंग की। इसके साथ ही न्यूज़ एंकरिंग और वीडियो एडिटिंग का व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त किया, जिससे डिजिटल और मल्टीमीडिया पत्रकारिता की उनकी समझ और अधिक सशक्त हुई। इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर से जुड़कर हार्ड न्यूज़, समसामयिक घटनाओं और लाइफस्टाइल पत्रकारिता सहित विभिन्न विषयों पर रिपोर्टिंग और लेखन किया। तथ्यपरक, निष्पक्ष और संतुलित पत्रकारिता में विश्वास रखते हुए वे प्रत्येक समाचार को विश्वसनीय स्रोतों, तथ्यों के सत्यापन और गहन अध्ययन के आधार पर प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देती हैं। वर्तमान में शिंकी सिंह राष्ट्र भारत से जुड़ी हैं, जहाँ वे राष्ट्रीय, राजनीतिक, सामाजिक और जनहित से जुड़े विषयों पर समाचार, विश्लेषण और विशेष रिपोर्ट तैयार कर रही हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक, प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना है। शैक्षणिक रूप से उन्होंने महार्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU), रोहतक से बी.एड. की शिक्षा प्राप्त की है। इसके अतिरिक्त इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से इतिहास एवं अंग्रेज़ी विषयों में स्नातकोत्तर (Master's) की डिग्री हासिल की है। वे पत्रकारिता में निरंतर सीखने, बदलते मीडिया परिदृश्य के अनुरूप स्वयं को अपडेट रखने तथा तथ्यों की पुष्टि के बाद ही समाचार प्रकाशित करने में विश्वास रखती हैं।