पश्चिम बंगाल में साइबर ठगी के पीड़ितों के लिए बड़ी राहत, अब घर बैठे ऑनलाइन मिलेंगे फंसे हुए पैसे वापस

पश्चिम बंगाल में साइबर ठगी के शिकार लोग अब 'मनी रेस्टोरेशन पोर्टल' के जरिए घर बैठे फ्रीज पैसे वापस पा सकते हैं जानें पूरी प्रक्रिया।
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साइबर फ्रॉड का पैसा वापस पाने की पूरी प्रक्रिया, यहां जानें
साइबर जालसाजी का शिकार होने के बाद गंवाए गए पैसों को वापस पाने की प्रक्रिया अब बेहद आसान हो गई है। ठगी के शिकार लोग अक्सर समझ नहीं पाते कि पैसे कैसे वापस मिलेंगे और इसके लिए उन्हें पूरी तरह पुलिस पर निर्भर रहना पड़ता था। कई मामलों में ‘फ्रोजन फंड’ (फ्रीज किए गए पैसे) को वापस दिलाने में पुलिस की ओर से देरी की शिकायतें भी सामने आती थीं। लेकिन अब इस समस्या का समाधान निकल आया है और पीड़ित खुद ही अपने पैसे वापस पा सकते हैं। इसके लिए बस उन्हें एक निश्चित पोर्टल पर जाकर अपनी शिकायत संख्या और अन्य विवरण दर्ज करने होंगे और वे फ्रीज हुए पैसों की वापसी का दावा कर सकेंगे।
पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर खुद रिफंड मांगें
साइबर ठगी का शिकार होने पर लोग तुरंत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर शिकायत दर्ज करते हैं। इससे समय रहते अपराधियों के खातों में ट्रांसफर हो रहे पैसों को ब्लॉक कर दिया जाता है और वह रकम फ्रीज हो जाती है। जांच के दौरान पुलिस कई संदिग्ध ‘म्यूल अकाउंट’ का पता लगाकर बैंक को पत्र भेजती है जिससे पैसे फ्रीज हो जाते हैं। हालांकि पहले अक्सर पुलिस द्वारा बैंकों को समय पर पत्र न भेजने की शिकायतें मिलती थीं।
केंद्र सरकार का नया कदम
इस समस्या को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने ‘मनी रेस्टोरेशन पोर्टल’ की शुरुआत की है जिससे अब पश्चिम बंगाल राज्य को भी जोड़ दिया गया है। इस नई व्यवस्था के आने से अब पश्चिम बंगाल के पीड़ितों को पुलिस के भरोसे नहीं बैठना पड़ेगा बल्कि वे इस पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करके सीधे अपने फ्रीज किए गए पैसे वापस पाने का दावा कर सकेंगे।
दस्तावेज अपलोड करते ही सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर होगी रकम
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14 अंकों की आईडी से प्रक्रिया शुरू: साइबर धोखाधड़ी के शिकार व्यक्ति को सबसे पहले नेशनल पोर्टल पर शिकायत दर्ज करनी होगी जिसके बाद उसे 14 अंकों की एक विशेष आईडी प्राप्त होगी। इसी आईडी की मदद से ‘मनी रेस्टोरेशन पोर्टल’ पर प्रवेश करना होता है।
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जरूरी कागजात साझा करना: पोर्टल पर पीड़ित को अपना पैन कार्ड और बैंक से जुड़े कागजात अपलोड करने होंगे। यदि इस मामले में कोर्ट का कोई आदेश है तो उसकी प्रति भी अपलोड करनी जरूरी होगी।
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खाते में सीधे पैसे पहुंचना: सभी विवरण सही पाए जाने पर फ्रीज की गई राशि बिना किसी रुकावट के सीधे आवेदक के बैंक खाते में भेज दी जाती है।
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पूरी तरह मुफ्त और पारदर्शी प्रक्रिया: इस ऑनलाइन सुविधा का उपयोग करने के लिए पीड़ितों को अपनी तरफ से एक भी रुपया खर्च नहीं करना पड़ता। अब रिफंड पाने के लिए किसी पुलिसकर्मी या एजेंट के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है।
रिपोर्ट: शिंकी सिंह, कोलकाता

