
ईरान में पिछले कुछ हफ्तों से जारी विरोध प्रदर्शनों पर सरकारी कार्रवाई को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है। ईरान इंटरनेशनल नामक मीडिया संस्था ने दावा किया है कि 8 और 9 जनवरी को हुई कार्रवाई में कम से कम 12,000 लोगों की मौत हो गई है। यह आंकड़ा सरकारी आंकड़ों और मानवाधिकार संगठनों के दावों से कहीं अधिक है। देश में 8 जनवरी से इंटरनेट पूरी तरह बंद होने के कारण असली स्थिति का पता लगाना मुश्किल हो गया है। विरोध प्रदर्शन की शुरुआत कैसे हुई 28 दिसंबर 2025 को ईरान की मुद्रा रियाल की कीमत अचानक

ईरान में पिछले कुछ हफ्तों से जारी विरोध प्रदर्शनों पर सरकारी कार्रवाई को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है। ईरान इंटरनेशनल नामक मीडिया संस्था ने दावा किया है कि 8 और 9 जनवरी को हुई कार्रवाई में कम से कम 12,000 लोगों की मौत हो गई है। यह आंकड़ा सरकारी आंकड़ों और मानवाधिकार संगठनों के दावों से कहीं अधिक है। देश में 8 जनवरी से इंटरनेट पूरी तरह बंद होने के कारण असली स्थिति का पता लगाना मुश्किल हो गया है। विरोध प्रदर्शन की शुरुआत कैसे हुई 28 दिसंबर 2025 को ईरान की मुद्रा रियाल की कीमत अचानक

मुंबई में आयोजित पत्रकार वार्ता में विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष और प्रसिद्ध अधिवक्ता श्री आलोक कुमार ने बांग्लादेश के मैमनसिंह शहर में घटी एक दिल दहला देने वाली घटना पर गहरा दुःख प्रकट किया। हिंदू युवक दीपु चंद्रदास की भीड़ द्वारा की गई हत्या ने पूरे विश्व में हिंदू समाज को झकझोर कर रख दिया है। यह घटना केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि मानवता और धर्मनिरपेक्षता पर एक गहरा प्रहार है। घटना का विवरण और परिस्थितियां श्री आलोक कुमार ने बताया कि दीपु चंद्रदास नामक युवक ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखी थी जिसमें उन्होंने लिखा

मुंबई में आयोजित पत्रकार वार्ता में विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष और प्रसिद्ध अधिवक्ता श्री आलोक कुमार ने बांग्लादेश के मैमनसिंह शहर में घटी एक दिल दहला देने वाली घटना पर गहरा दुःख प्रकट किया। हिंदू युवक दीपु चंद्रदास की भीड़ द्वारा की गई हत्या ने पूरे विश्व में हिंदू समाज को झकझोर कर रख दिया है। यह घटना केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि मानवता और धर्मनिरपेक्षता पर एक गहरा प्रहार है। घटना का विवरण और परिस्थितियां श्री आलोक कुमार ने बताया कि दीपु चंद्रदास नामक युवक ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखी थी जिसमें उन्होंने लिखा

नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने वेनेज़ुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना माचाडो को 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा की है। उन्हें यह सम्मान लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और तानाशाही से शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक बदलाव लाने के प्रयासों के लिए दिया गया। समिति ने माचाडो को “लोकतंत्र की लौ जलाने वाली साहसी महिला” बताया। नोबेल समिति ने बयान में कहा, “2025 का नोबेल शांति पुरस्कार शांति और लोकतंत्र की एक प्रतिबद्ध समर्थक को दिया जाता है, जिसने अंधकार भरे दौर में भी नागरिक अधिकारों की रक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना के लिए संघर्ष किया।” लोकतंत्र समर्थक आंदोलन की प्रतीक

नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने वेनेज़ुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना माचाडो को 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा की है। उन्हें यह सम्मान लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और तानाशाही से शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक बदलाव लाने के प्रयासों के लिए दिया गया। समिति ने माचाडो को “लोकतंत्र की लौ जलाने वाली साहसी महिला” बताया। नोबेल समिति ने बयान में कहा, “2025 का नोबेल शांति पुरस्कार शांति और लोकतंत्र की एक प्रतिबद्ध समर्थक को दिया जाता है, जिसने अंधकार भरे दौर में भी नागरिक अधिकारों की रक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना के लिए संघर्ष किया।” लोकतंत्र समर्थक आंदोलन की प्रतीक

Patna Police Custody Death: सुलतानगंज में पुलिस की पिटाई से युवक की मौत, इंसाफ की उठी मांग राजधानी पटना सिटी से एक बार फिर पुलिस बर्बरता का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। Patna Police Custody Death के इस ताज़ा मामले ने पूरे सुलतानगंज इलाके को हिला कर रख दिया है। आरोप है कि हिरासत में एक युवक की पुलिस पिटाई से मौत हो गई, जिसके बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया है। मृतक की पहचान संतोष कुमार, निवासी गरहुआ टोला, सुलतानगंज के रूप में हुई है। संतोष रोज़ाना चाय बेचकर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। परिजनों

Patna Police Custody Death: सुलतानगंज में पुलिस की पिटाई से युवक की मौत, इंसाफ की उठी मांग राजधानी पटना सिटी से एक बार फिर पुलिस बर्बरता का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। Patna Police Custody Death के इस ताज़ा मामले ने पूरे सुलतानगंज इलाके को हिला कर रख दिया है। आरोप है कि हिरासत में एक युवक की पुलिस पिटाई से मौत हो गई, जिसके बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया है। मृतक की पहचान संतोष कुमार, निवासी गरहुआ टोला, सुलतानगंज के रूप में हुई है। संतोष रोज़ाना चाय बेचकर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। परिजनों