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Google: एआई से बदलेगी पढ़ाई, शिक्षक की भूमिका रहेगी सबसे बड़ी

Google AI in Education: गूगल का कहना, कक्षा में एआई शिक्षक की मदद के लिए है
Google AI in Education: गूगल का कहना, कक्षा में एआई शिक्षक की मदद के लिए है (File Photo)

Google AI in Education: गूगल का कहना है कि शिक्षा में एआई शिक्षक की जगह नहीं ले सकता। एआई का उद्देश्य शिक्षकों का समय बचाना, पढ़ाई को सरल बनाना और छात्रों को व्यक्तिगत सीखने में मदद करना है। भारत में गूगल सरकार और संस्थानों के साथ मिलकर जिम्मेदार एआई शिक्षा को आगे बढ़ा रहा है।

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आज के समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई तेजी से हर क्षेत्र में अपनी जगह बना रही है। शिक्षा भी इससे अलग नहीं है। कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या आने वाले समय में एआई शिक्षक की जगह ले लेगा। इसी विषय पर गूगल ने अपनी साफ राय रखी है। गूगल का कहना है कि एआई शिक्षा में शिक्षक का सहायक है, न कि उनका विकल्प।

गूगल हाल के समय में भारत में शिक्षा के क्षेत्र में एआई को लेकर कई नई पहल कर रहा है। कंपनी का मानना है कि एआई का सही उपयोग शिक्षकों का बोझ कम कर सकता है और छात्रों को बेहतर सीखने का मौका दे सकता है।

शिक्षा में एआई को लेकर गूगल की सोच

गूगल के शिक्षा विभाग के उपाध्यक्ष क्रिस फिलिप्स के अनुसार, एआई का मकसद शिक्षक को हटाना नहीं है। उनका कहना है कि एआई उपकरण, जैसे जेमिनी, शिक्षकों को अधिक समय देने के लिए बनाए गए हैं ताकि वे छात्रों से बेहतर जुड़ सकें।

क्रिस फिलिप्स का मानना है कि पढ़ाने का काम केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं है। इसमें भावनात्मक जुड़ाव, मार्गदर्शन और समझ की जरूरत होती है, जो केवल एक शिक्षक ही दे सकता है। एआई इन मानवीय पहलुओं की जगह नहीं ले सकता।

जेमिनी एआई कैसे करता है मदद

जेमिनी एआई जैसे उपकरण शिक्षकों की रोजमर्रा की कई जिम्मेदारियों को आसान बना सकते हैं। जैसे पाठ योजना बनाना, अभ्यास प्रश्न तैयार करना और छात्रों की प्रगति को समझना। इससे शिक्षक का समय बचता है और वे छात्रों पर अधिक ध्यान दे पाते हैं।

इसके साथ ही एआई छात्रों के लिए व्यक्तिगत सीखने का रास्ता भी तैयार करता है। हर छात्र की समझ और गति अलग होती है, जिसे एआई आसानी से पहचान सकता है और उसी अनुसार मदद कर सकता है।

भारत में एआई शिक्षा पर खास ध्यान

गूगल ने भारत को एआई शिक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण देश माना है। कंपनी का कहना है कि भारत में ऐसे उपयोगकर्ता हैं जो नई तकनीक को जल्दी अपनाते हैं और उसका सही उपयोग करते हैं।

इसी सोच के तहत गूगल ने भारत सरकार और कई शिक्षण संस्थानों के साथ साझेदारी की है। यह साझेदारी शिक्षा में एआई को जिम्मेदारी के साथ लागू करने पर केंद्रित है।

सरकारी और शैक्षणिक संस्थानों से सहयोग

गूगल ने कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के साथ मिलकर काम करने की घोषणा की है। इसके अलावा चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के साथ भी साझेदारी की गई है।

इन साझेदारियों का उद्देश्य यह है कि एआई को सीधे छात्रों तक पहुंचाने के बजाय पहले शिक्षकों के माध्यम से कक्षा में लाया जाए। इससे एआई का उपयोग सही दिशा में हो सकेगा।

शिक्षकों को एआई की ट्रेनिंग

गूगल का लक्ष्य है कि वह 40 हजार से अधिक केंद्रीय विद्यालय के शिक्षकों को जिम्मेदार एआई के बारे में प्रशिक्षण दे। इस प्रशिक्षण में यह सिखाया जाएगा कि एआई का उपयोग पढ़ाई को बेहतर बनाने के लिए कैसे किया जाए।

इससे शिक्षक नई तकनीक से डरने के बजाय उसे अपनाने में सहज महसूस करेंगे और छात्रों के हित में उसका उपयोग कर पाएंगे।

छात्रों के लिए नए प्रयोग

गूगल ने हाल ही में जेमिनी एआई के जरिए एक मॉक जेईई टेस्ट भी शुरू किया है। यह टेस्ट फिजिक्स वाला और करियर360 के सहयोग से तैयार किया गया है।

इसका उद्देश्य छात्रों को परीक्षा की बेहतर तैयारी में मदद करना है। हालांकि गूगल का कहना है कि ऐसे उपकरण शिक्षक की भूमिका को कम नहीं करते, बल्कि उसे मजबूत बनाते हैं।

शिक्षक की भूमिका सबसे अहम

क्रिस फिलिप्स के अनुसार, शिक्षा में एआई तभी सफल हो सकता है जब शिक्षक इसकी अगुवाई करें। पाठ्यक्रम, पढ़ाने का तरीका और मूल्यांकन का फैसला शिक्षक को ही करना चाहिए।

एआई केवल एक साधन है, जो शिक्षक के निर्देशों के अनुसार काम करता है। इससे शिक्षा का स्तर बेहतर हो सकता है और छात्रों के नतीजे भी सुधर सकते हैं।

मानव जुड़ाव का कोई विकल्प नहीं

गूगल साफ तौर पर मानता है कि एआई तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो, वह शिक्षक और छात्र के बीच के मानवीय रिश्ते की जगह नहीं ले सकती।

शिक्षा केवल विषय समझाने का नाम नहीं है, बल्कि यह सोचने, समझने और सही दिशा दिखाने की प्रक्रिया है। इसमें शिक्षक की भूमिका हमेशा अहम बनी रहेगी।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।