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क्या E20 पेट्रोल से खराब हो रहा है इंजन? केंद्र ने बताई पूरी सच्चाई

क्या E20 पेट्रोल से खराब हो रहा है इंजन? केंद्र ने बताई पूरी सच्चाई
क्या E20 पेट्रोल से खराब हो रहा है इंजन? केंद्र ने बताई पूरी सच्चाई

एथनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा है कि E20 पेट्रोल के कारण इंजन खराब होने की कोई व्यापक शिकायत सामने नहीं आई है और कार्यक्रम की लगातार निगरानी की जा रही है।

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Dipali Kumari
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Ethanol Blended Petrol-E20: एथनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं और दावों के बीच पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। मंत्रालय ने साफ कहा है कि एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम पूरी तरह वैज्ञानिक आधार पर संचालित किया जा रहा है और इसकी लगातार निगरानी की जा रही है। सरकार के अनुसार, ई-20 पेट्रोल के इस्तेमाल से इंजन खराब होने या वाहनों में किसी तरह की व्यापक तकनीकी समस्या सामने नहीं आई है।

लोगों को भ्रमित करने की कोशिश

मंत्रालय ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि इंटरनेट मीडिया पर एथनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर कुछ भ्रामक और निराधार दावे फैलाए जा रहे हैं। कई पुराने वीडियो और तस्वीरों को नए संदर्भ में साझा कर लोगों को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है। सरकार ने कहा कि ऐसे दावों पर नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर उचित कार्रवाई भी की जाएगी।

वायरल  वीडियो में टैंक के पास दिखी थी चींटियां

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें ईंधन टैंक के पास चींटियां दिखाई दे रही थीं। कुछ लोगों ने इसे एथनॉल मिश्रित पेट्रोल से जोड़कर सवाल उठाए थे। मंत्रालय ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि इसका एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम से कोई संबंध नहीं है और ऐसे वीडियो भ्रामक जानकारी फैलाने का प्रयास हैं।

 भारत में एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम की शुरुआत

मंत्रालय ने बताया कि भारत में एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2003 में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। तकनीकी परीक्षणों और विभिन्न हितधारकों से परामर्श के बाद इस कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया।

सरकार ने वर्ष 2023 से 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल यानी ई-20 के उपयोग को बढ़ावा देना शुरू किया। मंत्रालय के अनुसार, तेल विपणन कंपनियां, ऑटोमोबाइल निर्माता, ईंधन परीक्षण एजेंसियां और अन्य विशेषज्ञ संस्थाएं इस कार्यक्रम की नियमित समीक्षा करती हैं। अब तक किसी बड़े स्तर पर इंजन खराब होने या वाहन के प्रदर्शन पर नकारात्मक प्रभाव की शिकायत सामने नहीं आई है।

दुनिया के कई देशों में हो रहा एथनॉल मिश्रणका इस्तेमाल

मंत्रालय ने यह भी बताया कि एथनॉल मिश्रण केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों में सफलतापूर्वक अपनाई गई व्यवस्था है। इस कार्यक्रम के जरिए भारत को अब तक लगभग 1.40 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिली है। साथ ही गन्ना और अन्य फसलों से जुड़े किसानों की आय बढ़ाने में भी यह योजना महत्वपूर्ण साबित हुई है।

सरकार का कहना है कि एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरणीय लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में एक अहम कदम है, इसलिए लोगों को सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट जानकारियों के बजाय आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करना चाहिए।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।