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NEET UG 2026: 3 मई को परीक्षा, NTA ने जारी किए जरूरी नियम; हील वाली सैंडल, झुमके समेत कई चीजों पर रोक

NEET UG 2026: 3 मई को परीक्षा, NTA ने जारी किए जरूरी नियम; हील वाली सैंडल, झुमके समेत कई चीजों पर रोक
NEET UG 2026: : 3 मई को परीक्षा, NTA ने जारी किए जरूरी नियम; हील वाली सैंडल, झुमके समेत कई चीजों पर रोक (Pic Credit- X @NTA_Exams)

NEET UG 2026 परीक्षा 3 मई को होगी। NTA ने ड्रेस कोड और जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। छात्रों को सिंपल कपड़े, चप्पल या कम हील सैंडल पहनकर आना होगा। जूते, भारी आभूषण और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स बैन रहेंगे। समय से पहले पहुंचना और नियमों का पालन जरूरी है।

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Dipali Kumari
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NEET UG 2026: देशभर में लाखों छात्र जिस परीक्षा का इंतजार कर रहे हैं, वह अब बेहद करीब है। NEET UG 2026 की परीक्षा 3 मई को आयोजित होने जा रही है। मेडिकल कॉलेज में दाखिले का सपना देख रहे छात्रों के लिए यह दिन बेहद अहम है। ऐसे में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने परीक्षा को लेकर जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं, ताकि परीक्षा केंद्र पर किसी तरह की परेशानी न हो।

सिंपल कपड़ों में ही मिलेगा प्रवेश

इस बार NTA ने खासतौर पर ड्रेस कोड और परीक्षा केंद्र पर ले जाने वाली चीजों को लेकर साफ निर्देश दिए हैं। एजेंसी ने कहा है कि सभी छात्र-छात्राओं को बहुत ही सिंपल और हल्के कपड़े पहनकर परीक्षा देने पहुंचना होगा। फुल स्लीव कपड़े या ऊनी कपड़े पहनने की अनुमति नहीं होगी। हालांकि अगर किसी विशेष परिस्थिति या धार्मिक कारण से ऐसा जरूरी हो, तो पहले से इसकी जानकारी देनी होगी।

हील वाली सैंडल, झुमके और अंगूठी पर प्रतिबंध

सबसे जरूरी बात यह है कि परीक्षा केंद्र पर किसी भी तरह के भारी आभूषण, जैसे चेन, अंगूठी, ईयररिंग या अन्य एक्सेसरीज पहनकर न जाएं। इससे एंट्री में दिक्कत हो सकती है। पैरों में सिर्फ चप्पल या कम हील वाली सैंडल पहनने की अनुमति है। जूते या मोटे सोल वाले फुटवियर पूरी तरह बैन रहेंगे।

ट्रांसपेरेंट पानी की बोतल ले जाने की अनुमति

NTA ने राहत देते हुए कहा है कि छात्र अपने साथ ट्रांसपेरेंट पानी की बोतल ले जा सकते हैं। साथ ही एडमिट कार्ड और जरूरी दस्तावेज जरूर रखें। मोबाइल फोन, स्मार्टवॉच, ब्लूटूथ डिवाइस, कैलकुलेटर या किसी भी तरह के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स परीक्षा केंद्र में ले जाना पूरी तरह मना है।

एजेंसी ने यह भी कहा है कि परीक्षा केंद्र पर समय से पहले पहुंचना बेहद जरूरी है। देर से पहुंचने वाले छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसलिए घर से निकलने से पहले एडमिट कार्ड, फोटो आईडी और जरूरी स्टेशनरी जरूर चेक कर लें।

पगड़ी या हिजाब वाले अभ्यर्थी पहले पहुंचे सेंटर

धार्मिक परिधान जैसे पगड़ी या हिजाब की अनुमति रहेगी, लेकिन इसके लिए अतिरिक्त जांच प्रक्रिया हो सकती है। ऐसे में ऐसे अभ्यर्थियों को और पहले पहुंचने की सलाह दी गई है।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।