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बॉर्डर 2 के आगे नहीं टिक पाई रानी मुख़र्जी की फिल्म ‘मर्दानी 3’, पहले ही हफ्ते में टूटी उम्मीदें

बॉर्डर 2 के आगे नहीं टिक पाई रानी मुख़र्जी की फिल्म ‘मर्दानी 3’, पहले ही हफ्ते में टूटी उम्मीदें
बॉर्डर 2 के आगे नहीं टिक पाई रानी मुख़र्जी की फिल्म ‘मर्दानी 3’ (Pic Credit- IMDb)

बॉर्डर 2 और मर्दानी 3 के बीच बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त टक्कर देखने को मिली। सनी देओल की बॉर्डर 2 ने 300 करोड़ से ज्यादा कमाकर बाजी मार ली, जबकि रानी मुखर्जी की मर्दानी 3 को अच्छी तारीफ के बावजूद कमाई में संघर्ष करना पड़ा।

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Dipali Kumari
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Border 2 Vs Mardaani 3: इस वक्त बॉक्स ऑफिस पर दो बड़ी फिल्मों के बीच दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल रहा है। एक तरफ हैं सनी देओल की मेगा बजट और देशभक्ति से भरपूर फिल्म ‘बॉर्डर 2’, तो दूसरी ओर रानी मुखर्जी की दमदार क्राइम थ्रिलर ‘मर्दानी 3’। दोनों ही फिल्में अपनी-अपनी पहचान और मजबूत फैन बेस के साथ रिलीज हुईं, लेकिन कमाई के आंकड़े साफ बता रहे हैं कि दर्शकों का झुकाव किस ओर ज्यादा रहा।

जहां ‘बॉर्डर 2’ ने रिलीज के साथ ही सिनेमाघरों में जबरदस्त माहौल बना दिया, वहीं ‘मर्दानी 3’ को दर्शकों की तारीफ के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। यह टक्कर सिर्फ दो फिल्मों की नहीं, बल्कि दो अलग सोच, दो जॉनर और दो तरह के दर्शकों की पसंद की भी है।

बॉर्डर 2 ने पहले ही हफ्ते में बनाया मजबूत आधार

सनी देओल की ‘बॉर्डर 2’ को लेकर दर्शकों में पहले से ही जबरदस्त उत्साह था। देशभक्ति, जज्बा और बड़े पर्दे पर सनी देओल की दमदार मौजूदगी ने फिल्म को शानदार ओपनिंग दिलाई। पहले ही दिन फिल्म ने करीब 30 करोड़ रुपये की कमाई कर यह संकेत दे दिया था कि यह फिल्म लंबी रेस में आगे रहने वाली है।

दूसरे और तीसरे दिन फिल्म की कमाई में और तेजी आई। तीसरे दिन 54.5 करोड़ रुपये का आंकड़ा छूना यह साबित करता है कि वीकेंड पर दर्शक बड़ी संख्या में सिनेमाघरों तक पहुंचे। चौथे दिन 59 करोड़ रुपये की कमाई ने फिल्म को मजबूत पकड़ दे दी।

डे वाइज कलेक्शन में उतार-चढ़ाव,

पहले चार दिनों के बाद ‘बॉर्डर 2’ की कमाई में हल्की गिरावट जरूर आई, लेकिन फिल्म पूरी तरह से थमी नहीं। पांचवें दिन 20 करोड़ और छठे-सातवें दिन भी दो अंकों में कमाई यह दिखाती है कि फिल्म को वर्ड ऑफ माउथ का फायदा मिला।

दूसरे वीकेंड पर एक बार फिर फिल्म के कलेक्शन में उछाल देखने को मिला। यही वजह रही कि 16 दिनों में फिल्म करीब 301.50 करोड़ रुपये का कारोबार करने में सफल रही। यह आंकड़ा ‘बॉर्डर 2’ को इस साल की सबसे बड़ी हिट फिल्मों की कतार में खड़ा कर देता है।

‘बॉर्डर 2’ की सफलता के पीछे सिर्फ बड़े बजट या स्टार पावर नहीं, बल्कि उसकी भावनात्मक पकड़ भी है। देशभक्ति के जज्बे, सैनिकों की कहानी और सनी देओल की गूंजती आवाज ने दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचा। यही वजह है कि गिरावट के बावजूद फिल्म टिके रहने में कामयाब रही।

मर्दानी 3 को मिली तारीफ, लेकिन कमाई में पिछड़ी

वहीं रानी मुखर्जी की ‘मर्दानी 3’ ने एक बार फिर महिला सशक्तिकरण और अपराध के खिलाफ मजबूत कहानी पेश की। रानी ने पुलिस ऑफिसर शिवानी शिवाजी रॉय के किरदार में दमदार अभिनय किया, जिसकी आलोचकों ने जमकर तारीफ की।

हालांकि, अच्छी कहानी और शानदार अभिनय के बावजूद फिल्म बॉक्स ऑफिस पर वो कमाल नहीं दिखा पाई, जिसकी उम्मीद की जा रही थी। पहले दिन 4 करोड़ रुपये की ओपनिंग के बाद दूसरे और तीसरे दिन थोड़ी बढ़त जरूर दिखी, लेकिन इसके बाद फिल्म की रफ्तार धीमी पड़ गई।

वीकेंड का भी नहीं मिला खास फायदा

‘मर्दानी 3’ को शुरुआती वीकेंड के बाद दर्शकों का वैसा समर्थन नहीं मिला, जैसा ‘बॉर्डर 2’ को मिला। चौथे दिन से ही फिल्म की कमाई 2 से 3 करोड़ के बीच सिमटती चली गई। नौवें दिन कुल कलेक्शन करीब 30.90 करोड़ रुपये तक पहुंच सका।

नई फिल्मों की एंट्री और बड़े बजट की फिल्मों के दबाव में ‘मर्दानी 3’ के लिए आगे टिके रहना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

दो अलग जॉनर, दो अलग नतीजे

इस बॉक्स ऑफिस क्लैश ने यह साफ कर दिया कि बड़े पैमाने पर बनी देशभक्ति फिल्में अभी भी दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में ज्यादा सफल हो रही हैं। वहीं गंभीर और कंटेंट आधारित फिल्मों को तारीफ तो मिलती है, लेकिन कमाई के मामले में उन्हें संघर्ष करना पड़ता है।

आने वाले दिनों में नई फिल्मों की रिलीज से मुकाबला और कड़ा होने वाला है। ऐसे में ‘बॉर्डर 2’ की नजर अब और बड़े आंकड़ों पर होगी, जबकि ‘मर्दानी 3’ के लिए धीरे-धीरे सिनेमाघरों की संख्या कम हो सकती है।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।