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एंड्रॉयड 17 में गूगल ला सकता है एप्पल जैसा लिक्विड ग्लास डिज़ाइन

एंड्रॉयड 17 में गूगल ला सकता है एप्पल जैसा लिक्विड ग्लास डिज़ाइन
Google android 17 UI Update: गूगल लाने वाला है एप्पल जैसा नया लुक (AI Photo)

गूगल एंड्रॉयड 17 में एप्पल स्टाइल लिक्विड ग्लास डिज़ाइन लाने की तैयारी में है। नया इंटरफेस ज्यादा पारदर्शी और धुंधले किनारों वाला होगा। वॉल्यूम कंट्रोल, पावर मेनू और होम स्क्रीन में ब्लर इफेक्ट्स जोड़े जाएंगे। हालांकि पुराने डिवाइसेज पर परफॉर्मेंस को लेकर चिंता बनी हुई है। पहला डेवलपर प्रीव्यू अगले साल आ सकता है।

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Asfi Shadab
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Google android 17 UI Update: एंड्रॉयड यूज़र्स के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। गूगल अपने आने वाले ऑपरेटिंग सिस्टम एंड्रॉयड 17 में एक बिल्कुल नया डिज़ाइन लाने की तैयारी में है। यह डिज़ाइन एप्पल के लिक्विड ग्लास स्टाइल से प्रेरित होगा। पिछले कई सालों से एंड्रॉयड का इंटरफेस लगभग एक जैसा ही रहा है। लेकिन अब लीक्स और रिपोर्ट्स से पता चल रहा है कि गूगल इस बार कुछ बड़े बदलाव करने वाला है। नया डिज़ाइन ज्यादा पारदर्शी होगा और इसमें हल्के धुंधले किनारे होंगे। यह देखने में ज्यादा गहराई और परतदार लगेगा।

एंड्रॉयड 17 में क्या होगा खास

गूगल ने इस नए डिज़ाइन को अपनी कंपनी के अंदर सिनेमन बन नाम दिया है। यह नाम ही बताता है कि डिज़ाइन कितना नरम और आकर्षक होने वाला है। इस नए लुक में तेज किनारों और ठोस ऑब्जेक्ट्स की जगह गहराई और परतों पर फोकस किया जाएगा। इसके अलावा इंटरफेस ज्यादा जीवंत और तरल जैसा महसूस होगा। यह बदलाव एंड्रॉयड को आईओएस के करीब ले जाएगा। हालांकि गूगल पूरी तरह से एप्पल की नकल नहीं करेगा, बल्कि अपना अलग अंदाज़ बनाए रखेगा।

एंड्रॉयड 16 से शुरुआत

दरअसल, यह बदलाव अचानक नहीं है। गूगल ने एंड्रॉयड 16 में ही इस दिशा में पहला कदम उठाया था। पिछले साल कंपनी ने नोटिफिकेशन और क्विक सेटिंग्स में हल्के ब्लर इफेक्ट्स जोड़े थे। उस समय गूगल ने कहा था कि इससे गहराई का एहसास होता है और जानकारी को समझना आसान हो जाता है। अब एंड्रॉयड 17 में इस अवधारणा को और आगे बढ़ाया जाएगा। ब्लर इफेक्ट्स को सिस्टम के और भी हिस्सों में लगाया जाएगा। इससे पूरा इंटरफेस एक जैसा और खूबसूरत दिखेगा।

वॉल्यूम कंट्रोल में बदलाव

सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली बात यह है कि वॉल्यूम कंट्रोल का लुक बदल जाएगा। अभी तक वॉल्यूम कंट्रोल एक ठोस बार के अंदर दिखता है। लेकिन नए डिज़ाइन में यह एक अर्ध-पारदर्शी बैकग्राउंड पर तैरता हुआ दिखेगा। इसका मतलब है कि आपके वॉलपेपर या चालू ऐप का कुछ हिस्सा इसके पीछे से दिखाई देगा। यह देखने में काफी स्टाइलिश लगेगा। इसी तरह के बदलाव पावर मेनू और दूसरे सिस्टम पॉप-अप्स में भी होंगे जो ऐप्स के ऊपर दिखते हैं।

होम स्क्रीन पर नया अनुभव

होम स्क्रीन पर भी कुछ रोचक बदलाव देखने को मिलेंगे। अब मेनू पूरी तरह से बैकग्राउंड को नहीं छिपाएंगे। इसकी जगह ऐप आइकन और वॉलपेपर सिस्टम पैनल के पीछे हल्के धुंधले रूप में दिखेंगे। ब्लर का रंग यूज़र की चुनी हुई थीम के अनुसार बदलेगा। इससे पूरे फोन का लुक एक जैसा और संतुलित महसूस होगा। यह छोटा सा बदलाव यूज़र एक्सपीरियंस को काफी बेहतर बना सकता है।

गूगल का संयमित रवैया

हालांकि यह डिज़ाइन एप्पल के लिक्विड ग्लास स्टाइल से प्रेरित है, लेकिन गूगल इसे संयम से लागू करेगा। रिपोर्ट्स बताती हैं कि बदलाव सूक्ष्म होंगे न कि नाटकीय। एंड्रॉयड का पूरा लुक एक ही अपडेट में नहीं बदल जाएगा। गूगल धीरे-धीरे इस नई डिज़ाइन भाषा को पेश करेगा। यह एक समझदारी भरा कदम है क्योंकि यूज़र्स को अचानक बड़े बदलाव पसंद नहीं आते।

थर्ड पार्टी ऐप्स का सवाल

अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि थर्ड पार्टी ऐप्स को भी यही डिज़ाइन मिलेगा या नहीं। हो सकता है कि ब्लर इफेक्ट्स केवल बुनियादी सिस्टम सेवाओं तक सीमित रहें। अगर गूगल चाहता है कि पूरा एंड्रॉयड अनुभव एक जैसा हो, तो उसे डेवलपर्स को भी नए डिज़ाइन गाइडलाइन देने होंगे। तभी सभी ऐप्स में एक जैसा लुक और फील आएगा।

पुराने फोन्स पर परफॉर्मेंस की चिंता

एक और बड़ी चिंता पुराने पिक्सेल स्मार्टफोन्स पर परफॉर्मेंस को लेकर है। ब्लर इफेक्ट्स ज्यादा प्रोसेसिंग पावर खा सकते हैं। इससे पुराने डिवाइसेज पर फोन धीमा चल सकता है या बैटरी जल्दी खत्म हो सकती है। गूगल को इस बात का ध्यान रखना होगा कि नया डिज़ाइन सभी डिवाइसेज पर अच्छे से काम करे। शायद कंपनी पुराने फोन्स के लिए लाइट वर्जन भी दे सकती है।

कब आएगी पहली झलक

गूगल ने अभी तक इन बदलावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। लेकिन अफवाहें बताती हैं कि एंड्रॉयड 17 का पहला डेवलपर प्रीव्यू अगले साल की शुरुआत में आ सकता है। तब हमें असली तस्वीर पता चलेगी कि गूगल ने कितने बदलाव किए हैं। डेवलपर प्रीव्यू में कंपनी सबसे पहले डेवलपर्स को नए फीचर्स दिखाती है। इससे वे अपने ऐप्स को नए सिस्टम के लिए तैयार कर सकते हैं।

यूज़र्स के लिए क्या मायने रखता है

Google android 17 UI Update: आम यूज़र्स के लिए यह बदलाव कितना महत्वपूर्ण है? असल में, एक अच्छा डिज़ाइन फोन इस्तेमाल करने के अनुभव को बेहतर बनाता है। अगर इंटरफेस देखने में खूबसूरत और इस्तेमाल में आसान हो, तो यूज़र्स ज्यादा खुश रहते हैं। लिक्विड ग्लास डिज़ाइन से एंड्रॉयड ज्यादा आधुनिक और प्रीमियम लगेगा। यह खासकर उन लोगों को पसंद आएगा जो डिज़ाइन को महत्व देते हैं।

एप्पल से मुकाबला

एप्पल हमेशा से डिज़ाइन में आगे रहा है। आईओएस का इंटरफेस बहुत साफ और खूबसूरत माना जाता है। गूगल भी अब इस मोर्चे पर मुकाबला करना चाहता है। लिक्विड ग्लास डिज़ाइन एंड्रॉयड को आईओएस के बराबर ला सकता है। लेकिन गूगल को अपनी खुद की पहचान भी बनाए रखनी होगी। सिर्फ नकल करने से काम नहीं चलेगा।

एंड्रॉयड 17 के साथ गूगल एक नया अध्याय शुरू कर सकता है। अगर यह डिज़ाइन सफल रहा, तो आने वाले सालों में और भी बेहतरी देखने को मिल सकती है। फिलहाल हमें इंतज़ार करना होगा और देखना होगा कि गूगल आखिरकार क्या पेश करता है।

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Asfi Shadab

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।