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Hantavirus: चूहों से फैलने वाला खतरनाक वायरस, इसकी दवा भी नहीं; जानिए लक्षण और बचाव के तरीके

Hantavirus: चूहों से फैलने वाला खतरनाक वायरस, इसकी दवा भी नहीं; जानिए लक्षण और बचाव के तरीके
Hantavirus: चूहों से फैलने वाला खतरनाक वायरस, इसकी दवा भी नहीं; जानिए लक्षण और बचाव के तरीके

हंता वायरस चूहों से फैलने वाला खतरनाक संक्रमण है, जो सांस और किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारियां पैदा कर सकता है। संक्रमित चूहों के मल, पेशाब और लार के संपर्क से इसका खतरा बढ़ता है। फिलहाल इसकी कोई वैक्सीन या विशेष दवा उपलब्ध नहीं है, इसलिए बचाव और समय पर इलाज बेहद जरूरी है।

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Dipali Kumari
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Hantavirus: कोरोना महामारी के बाद दुनिया पहले ही वायरसों को लेकर ज्यादा सतर्क हो चुकी है। ऐसे में अब हंता वायरस (Hantavirus) को लेकर भी लोगों के बीच चिंता बढ़ रही है। यह वायरस कोई नया संक्रमण नहीं है, लेकिन इसकी गंभीरता और जानलेवा असर इसे बेहद खतरनाक बनाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के मुताबिक यह वायरस मुख्य रूप से संक्रमित चूहों और अन्य कुतरने वाले जीवों से इंसानों में फैलता है।

कैसे फ़ैल रहा हंता वायरस

विशेषज्ञों के अनुसार चूहों के मल, पेशाब और लार में मौजूद वायरस सूखने के बाद हवा में मिल जाता है। जब इंसान संक्रमित कणों को सांस के जरिए शरीर में लेता है, तो संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि इंसान से इंसान में इसका फैलना बेहद दुर्लभ माना जाता है, लेकिन दक्षिण अमेरिका में एंडीज वायरस के कुछ मामलों में ऐसा देखा गया है।

हंता वायरस के लक्षण

WHO के मुताबिक हंता वायरस कई प्रकार के होते हैं और हर वायरस का असर अलग हो सकता है। अमेरिका में यह वायरस हंता वायरस कार्डियोपल्मोनरी सिंड्रोम (HCPS) नाम की गंभीर बीमारी पैदा करता है। इसमें मरीज को तेज बुखार, खांसी, सांस लेने में परेशानी और फेफड़ों में पानी भरने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। गंभीर मामलों में यह बीमारी जानलेवा भी साबित हो सकती है और इसकी मृत्यु दर 50 प्रतिशत तक बताई गई है।

वहीं यूरोप और एशिया में हंता वायरस से हेमरेजिक फीवर विद रीनल सिंड्रोम (HFRS) नाम की बीमारी देखने को मिलती है। इस बीमारी में लो ब्लड प्रेशर, किडनी फेल होना और शरीर में अंदरूनी रक्तस्राव जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

शुरुआती लक्षण वायरल बुखार जैसे

हंता वायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे ही होते हैं। संक्रमित व्यक्ति को बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, पेट दर्द, उल्टी और मतली की शिकायत हो सकती है। यही वजह है कि कई बार लोग शुरुआत में इसे सामान्य संक्रमण समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।

फिलहाल नहीं है कोई दवा

सबसे चिंता की बात यह है कि फिलहाल हंता वायरस के लिए कोई विशेष वैक्सीन या एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं है। डॉक्टर मरीज की हालत के अनुसार इलाज करते हैं और सांस, दिल तथा किडनी से जुड़ी समस्याओं को नियंत्रित करने की कोशिश की जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर इलाज और आईसीयू सुविधा मिलने से मरीज की जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों को साफ-सफाई रखने, घरों में चूहों की संख्या नियंत्रित करने और संक्रमित जगहों की सफाई करते समय मास्क व दस्ताने पहनने की सलाह दे रहे हैं।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।