90 Days Hair Growth: 90 दिन में बाल उगाने का दावा कितना सच?

Health Awareness : 90 दिनों में बालों की स्थिति में सुधार कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में देखा गया है, लेकिन हर तेल, सीरम या सप्लीमेंट से 90 दिन में नए बाल उगने की गारंटी साबित नहीं है। बाल झड़ने के कई कारण हो सकते हैं, इसलिए बड़े-बड़े विज्ञापनी दावों के बजाय वैज्ञानिक प्रमाण देखना जरूरी है। लगातार बाल झड़ रहे हों तो उत्पादों पर पैसा खर्च करने से पहले त्वचा रोग विशेषज्ञ से सही कारण की जांच कराना बेहतर है।
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17 हजार करोड़ के बाजार में विज्ञापनों पर उठे सवाल
90 Days Hair Growth: बाल झड़ना आज बड़ी संख्या में लोगों की चिंता है। इसी चिंता के बीच बालों की देखभाल से जुड़े उत्पादों का बाजार भी तेजी से बढ़ रहा है। बालों का तेल, शैंपू, सीरम, सप्लीमेंट और दूसरे उत्पादों के विज्ञापनों में कम समय में बाल झड़ना रोकने, बाल घने करने और यहां तक कि 90 दिन में नए बाल उगाने के दावे किए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी ऐसे दावों की भरमार है। एक रिपोर्ट में भारत के हेयर-केयर बाजार का आकार करीब 17 हजार करोड़ रुपये बताया गया है। हालांकि यह पूरा बाजार केवल बाल उगाने वाले उत्पादों का नहीं है। इसमें शैंपू, बालों का तेल, बालों का रंग और बालों की देखभाल से जुड़े दूसरे उत्पाद भी शामिल हैं। इसलिए 17 हजार करोड़ रुपये को बाल उगाने के नाम पर होने वाले किसी घोटाले की रकम बताना सही नहीं होगा। लेकिन इतने बड़े बाजार में उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के लिए तेजी से परिणाम और गारंटी वाले दावे किए जाना जरूर चिंता का विषय है।
3 महीने में बालों में सुधार संभव
- 90 दिन में बालों की स्थिति में सुधार होना पूरी तरह असंभव नहीं है। वैज्ञानिक अध्ययनों में कुछ खास उत्पादों के इस्तेमाल के बाद तीन महीने में बालों की संख्या, मोटाई या बाल झड़ने की समस्या में सुधार देखा गया है।
- पबमेड में दर्ज एक अध्ययन में एक खास बाल सीरम का 90 दिनों तक परीक्षण किया गया। अध्ययन में 30 लोगों ने पूरी प्रक्रिया पूरी की। शोधकर्ताओं ने 90 दिन बाद बालों की घनत्व, मोटाई और मजबूती में सुधार तथा बाल झड़ने में कमी दर्ज की।
- एक दूसरे अध्ययन में 42 लोगों ने एक खास बाल सीरम का 90 दिनों तक इस्तेमाल किया। इसमें भी बालों की वृद्धि की दर और घनत्व में सुधार दर्ज किया गया।
- इन अध्ययनों से इतना जरूर पता चलता है कि कुछ लोगों में तीन महीने के भीतर बालों से जुड़े कुछ मानकों में सुधार हो सकता है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि बाजार में बिकने वाला हर तेल या सीरम 90 दिन में नए बाल उगा देगा।
- हाल के एक अन्य अध्ययन में 90 लोगों को तीन समूहों में बांटकर रोजमेरी-लैवेंडर तेल और रोजमेरी-कैस्टर तेल की तुलना नारियल तेल से की गई। यह अध्ययन 90 दिन चला और बालों की वृद्धि से जुड़े कई मानकों को मापा गया। इससे पता चलता है कि बालों की वृद्धि को लेकर वैज्ञानिक शोध हो रहे हैं, लेकिन किसी एक अध्ययन के नतीजे को हर व्यक्ति और हर उत्पाद पर लागू नहीं किया जा सकता।
समस्या बड़े दावों से शुरू होती है
असल सवाल तब उठता है, जब किसी उत्पाद के सीमित अध्ययन या उसके किसी एक घटक के आधार पर बहुत बड़ा दावा किया जाता है। भारतीय विज्ञापन मानक परिषद के एक मामले में एक हेयर-फॉल उत्पाद के विज्ञापन में बाल झड़ना कम करने और बालों की वृद्धि बढ़ाने के दावे किए गए थे। विज्ञापन में पहले और बाद की तस्वीरों के जरिए 90 दिन में बाल उगने का भरोसा भी दिया गया था। जांच के दौरान विज्ञापन देने वाली कंपनी इन दावों के समर्थन में पर्याप्त चिकित्सकीय प्रमाण नहीं दे सकी। भारतीय विज्ञापन मानक परिषद ने माना कि उत्पाद की प्रभावशीलता के लिए पर्याप्त चिकित्सकीय प्रमाण उपलब्ध नहीं कराए गए थे। पहले और बाद की तस्वीरों के जरिए 90 दिन में बाल उगने का संकेत भी भ्रामक माना गया और शिकायत को सही ठहराया गया। इस मामले से एक महत्वपूर्ण बात सामने आती है-90 दिन की अवधि अपने आप में गलत दावा नहीं है, लेकिन हर व्यक्ति के बाल 90 दिन में उगने की गारंटी देना बिना पर्याप्त प्रमाण के भ्रामक हो सकता है।
सोशल मीडिया पर भी सावधानी जरूरी
आज उपभोक्ता को जानकारी केवल टेलीविजन या अखबार के विज्ञापनों से नहीं मिलती। सोशल मीडिया पर प्रभावशाली लोग भी बालों के तेल, सीरम और सप्लीमेंट का प्रचार करते हैं। कई बार पहले और बाद की तस्वीरें दिखाकर किसी उत्पाद को असरदार बताया जाता है। लेकिन केवल तस्वीर देखकर यह साबित नहीं किया जा सकता कि व्यक्ति के बाल उसी उत्पाद की वजह से बढ़े हैं। बालों की स्थिति समय के साथ बदल सकती है और इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। विज्ञापन मानक परिषद की 2025-26 की समीक्षा में व्यक्तिगत देखभाल से जुड़े 639 मामलों की जांच की गई। इनमें करीब 90 प्रतिशत विज्ञापनों में बदलाव की जरूरत पाई गई। तेजी से परिणाम, गारंटी और दिखाई देने वाले बदलाव जैसे दावे प्रमुख आपत्तियों में शामिल रहे।
बाल झड़ने का कारण जानना भी जरूरी
हर व्यक्ति के बाल एक ही कारण से नहीं झड़ते। आनुवंशिक कारणों के अलावा हार्मोन में बदलाव, पोषण की कमी, तनाव और सिर की त्वचा से जुड़ी समस्याएं भी इसकी वजह हो सकती हैं। ऐसे में किसी एक तेल या सीरम को हर तरह के बाल झड़ने का इलाज बताना सही नहीं है। यदि किसी व्यक्ति के बाल किसी बीमारी या दूसरी स्वास्थ्य समस्या के कारण झड़ रहे हैं, तो केवल विज्ञापन देखकर कोई उत्पाद खरीदना समस्या का समाधान नहीं कर सकता। बाल लगातार झड़ रहे हों या तेजी से गंजापन बढ़ रहा हो तो महंगे उत्पादों के पीछे भागने के बजाय त्वचा रोग विशेषज्ञ से कारण की जांच कराना अधिक समझदारी है।
विज्ञापन और विज्ञान एक चीज नहीं
इस पूरे मामले की सबसे बड़ी सीख यही है कि विज्ञापन और विज्ञान एक चीज नहीं हैं। किसी उत्पाद पर “वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित” लिखा होना अपने आप में पर्याप्त नहीं है। यह देखना जरूरी है कि अध्ययन किस उत्पाद पर हुआ, कितने लोगों पर हुआ, कितने समय तक चला और क्या उसमें तुलना के लिए दूसरा समूह था। वैज्ञानिक अध्ययनों में 90 दिन के भीतर बालों से जुड़े कुछ सुधार के उदाहरण जरूर मिलते हैं। कुछ अध्ययनों में नियंत्रण समूह के मुकाबले भी सुधार देखा गया है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति को वही फायदा मिलेगा। समाज के लिए जागरूकता की जरूरत इसलिए भी है क्योंकि बाल झड़ने और गंजेपन को लेकर लोग अक्सर मानसिक दबाव में रहते हैं। ऐसे में अगर कोई विज्ञापन उनकी चिंता का फायदा उठाकर चमत्कार जैसे परिणामों का भरोसा देता है, तो उपभोक्ता के लिए नुकसान सिर्फ पैसे का नहीं हो सकता। वह सही उपचार में देरी भी कर सकता है। इसलिए “90 दिन में बाल” सुनकर तुरंत उत्पाद खरीदने के बजाय कुछ सवाल पूछना जरूरी है-किसके बाल झड़े थे? बाल झड़ने का कारण क्या था? अध्ययन किस उत्पाद पर हुआ? कितने लोगों पर हुआ? और अध्ययन में वास्तव में क्या साबित हुआ?
क्या है असली तस्वीर?
90 Days Hair Growth: भारत में हेयर-केयर का करीब 17 हजार करोड़ रुपये का बड़ा बाजार है। इस बाजार में बालों की वृद्धि से जुड़े अनेक दावे किए जा रहे हैं। कुछ खास उत्पादों पर 90 दिन के वैज्ञानिक अध्ययन भी मौजूद हैं और उनमें कुछ सुधार देखने को मिले हैं। लेकिन हर उत्पाद और हर व्यक्ति के लिए 90 दिन में नए बाल उगने की गारंटी साबित नहीं हुई है। इसलिए यह कहना भी सही नहीं होगा कि बाल उगाने वाले सभी उत्पाद फर्जी हैं। सही बात यह है कि जितना बड़ा दावा, उतना मजबूत प्रमाण जरूरी है। बालों की समस्या के नाम पर डर बेचने के बजाय लोगों को सही जानकारी देना ही इस बढ़ते बाजार में सबसे बड़ी जरूरत है। उपभोक्ता जागरूक होगा तो कंपनियों पर भी अपने दावों को वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ पेश करने का दबाव बढ़ेगा।

