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बजट सत्र के दौरान दिल्ली विधानसभा को बम से उड़ाने की धमकी, मची अफरा-तफरी

बजट सत्र के दौरान दिल्ली विधानसभा को बम से उड़ाने की धमकी, मची अफरा-तफरी
बजट सत्र के दौरान दिल्ली विधानसभा को बम से उड़ाने की धमकी (File Photo)

दिल्ली विधानसभा को बम से उड़ाने की धमकी वाले ईमेल ने अचानक सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी। सुबह-सुबह आए इन मेल्स में कई बड़े नेताओं के नाम भी शामिल हैं। आखिर किसने भेजी ये धमकी और क्या था इसका मकसद

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Dipali Kumari
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Bomb Threat Delhi Assembly: राजधानी दिल्मेंली उस वक्ड़त कंप मच गया जब दिल्ली विधानसभा को बम से उड़ाने की धमकी भरे ईमेल सामने आए। यह धमकी ऐसे समय पर मिली है जब विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता बजट पेश करने वाली हैं। घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जरूर बढ़ा दी है, लेकिन सरकार और प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि इससे कामकाज प्रभावित नहीं होगा।

सुबह-सुबह आये दो धमकी भरे ईमेल

जानकारी के मुताबिक, आज मंगलवार सुबह दो अलग-अलग ईमेल भेजे गए। पहला मेल सुबह 7:28 बजे विधानसभा के आधिकारिक ईमेल आईडी पर आया, जबकि दूसरा 7:49 बजे स्पीकर को भेजा गया। इन ईमेल्स में न सिर्फ विधानसभा को निशाना बनाने की बात कही गई, बल्कि कई बड़े नेताओं के नाम भी शामिल थे, जिससे मामला और गंभीर हो गया।

जांच के बाद नहीं मिला कुछ

धमकी की सूचना मिलते ही पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत हरकत में आ गईं। पूरे विधानसभा परिसर को घेर लिया गया और सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया। स्निफर डॉग स्क्वॉड को भी मौके पर तैनात किया गया, ताकि किसी भी संदिग्ध वस्तु की जांच की जा सके। अधिकारियों का कहना है कि हर कोने की बारीकी से जांच की जा रही है और फिलहाल किसी भी तरह की संदिग्ध चीज नहीं मिली है।

“पागलपन” में इस तरह की हरकतें करते हैं लोग- डिप्टी स्पीकर

डिप्टी स्पीकर मोहन सिंह बिष्ट ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसे लोग “पागलपन” में इस तरह की हरकतें करते हैं, लेकिन इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा का सत्र जारी रहेगा और सुरक्षा को और मजबूत किया जाएगा। उनका साफ संदेश था कि इस तरह की धमकियों से डरने की जरूरत नहीं है।

जांच में जुटी एजेंसियां

वहीं, जांच एजेंसियां अब इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि ये ईमेल कहां से भेजे गए और इसके पीछे कौन लोग हैं। साइबर टीम भी सक्रिय हो गई है और मेल के स्रोत को ट्रेस करने की कोशिश कर रही है।

गौरतलब है कि एक दिन पहले ही यानी सोमवार को बजट सत्र की शुरुआत पारंपरिक ‘खीर समारोह’ के साथ हुई थी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ‘विकसित दिल्ली, हरित दिल्ली’ के विजन को दोहराते हुए इसे दिल्लीवासियों के सपनों को साकार करने वाला बजट बताया था।

फिलहाल हालात नियंत्रण में हैं, लेकिन इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।