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India Suicide Report 2024: हर दिन औसतन 467 आत्महत्याएं, 2024 के आंकड़ों ने देश को झकझोरा

India Suicide Report 2024: हर दिन औसतन 467 आत्महत्याएं, 2024 के आंकड़ों ने देश को झकझोरा
India Suicide Report 2024: हर दिन औसतन 467 आत्महत्याएं, 2024 के आंकड़ों ने देश को झकझोरा ( Image - AI )

Daily Wage Workers : एनसीआरबी 2024 रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारत में आत्महत्या के मामलों ने नया रिकॉर्ड बनाया है। सबसे ज्यादा प्रभावित दिहाड़ी मजदूर रहे।

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Priyanka C. Mishra
Priyanka C. Mishra
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दिहाड़ी मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित

India Suicide Report 2024: नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो की ताजा “एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड्स इन इंडिया 2024” रिपोर्ट देश के सामाजिक और आर्थिक हालात की बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने लाती है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2024 में भारत में आत्महत्या के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 1 लाख 70 हजार 746 तक पहुंच गई है। साल 2015 में यह आंकड़ा लगभग 1.34 लाख था। पिछले एक दशक में आत्महत्या के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है, लेकिन सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि आत्महत्या करने वालों में सबसे बड़ा वर्ग दिहाड़ी मजदूरों का रहा है।

52 हजार से ज्यादा मजदूरों ने दी जान

India Suicide Report 2024: रिपोर्ट के अनुसार साल 2024 में 52 हजार 910 दिहाड़ी मजदूरों ने आत्महत्या की। कुल आत्महत्या मामलों में इनकी हिस्सेदारी 31 प्रतिशत रही, जो पिछले दस वर्षों में सबसे अधिक है। इससे पहले साल 2022 में यह आंकड़ा 26.4 प्रतिशत था। यह स्थिति इस बात की ओर इशारा करती है कि देश का असंगठित मजदूर वर्ग लगातार आर्थिक असुरक्षा, बेरोजगारी, कम आय और सामाजिक दबावों के बीच संघर्ष कर रहा है। एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक आत्महत्या करने वाले करीब 62.9 प्रतिशत लोगों की वार्षिक आय एक लाख रुपये से कम थी।

गृहिणियां और स्वरोजगार वाले भी दबाव में

India Suicide Report 2024: दिहाड़ी मजदूरों के अलावा गृहिणियां और स्वरोजगार से जुड़े लोग भी आत्महत्या करने वालों के बड़े वर्गों में शामिल रहे हैं। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में गृहिणियों और स्वरोजगार वालों की हिस्सेदारी में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इसके विपरीत दिहाड़ी मजदूरों में आत्महत्या के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अनिश्चित रोजगार, बढ़ती महंगाई, कर्ज का दबाव और सामाजिक तनाव इस वर्ग को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रहे हैं।

तमिलनाडु सबसे आगे, कई बड़े राज्य भी संकट में

India Suicide Report 2024: राज्यों की बात करें तो तमिलनाडु आत्महत्या के मामलों में सबसे आगे रहा। यहां 10 हजार 556 दिहाड़ी मजदूरों ने आत्महत्या की। इसके बाद महाराष्ट्र में 6 हजार 811, तेलंगाना में 5 हजार 745, मध्य प्रदेश में 5 हजार 299 और छत्तीसगढ़ में 3 हजार 413 मामले दर्ज किए गए। केंद्र शासित प्रदेशों में दिल्ली सबसे ऊपर रहा, जहां 343 दिहाड़ी मजदूरों ने आत्महत्या की। इन आंकड़ों से साफ है कि देश के कई औद्योगिक और आर्थिक रूप से सक्रिय राज्यों में मजदूर वर्ग गहरे संकट का सामना कर रहा है।

पारिवारिक तनाव भी बड़ी वजह

India Suicide Report 2024: एनसीआरबी की रिपोर्ट यह भी बताती है कि आत्महत्या के पीछे केवल आर्थिक तंगी ही कारण नहीं है। लगभग 35 प्रतिशत मामलों में पारिवारिक समस्याएं सबसे बड़ी वजह रहीं। इसके बाद बीमारी को दूसरा बड़ा कारण माना गया, जिसकी हिस्सेदारी 17.9 प्रतिशत रही। तेजी से बदलती सामाजिक परिस्थितियां, पारिवारिक तनाव, मानसिक दबाव और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी लोगों को मानसिक रूप से कमजोर बना रही हैं।

फांसी सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया गया तरीका

India Suicide Report 2024: रिपोर्ट में आत्महत्या के तरीकों का भी उल्लेख किया गया है। सबसे अधिक 62.3 प्रतिशत लोगों ने फांसी लगाकर आत्महत्या की। इसके बाद 24.5 प्रतिशत मामलों में जहर सेवन का तरीका अपनाया गया। डूबने से 4.4 प्रतिशत और ट्रेन या वाहनों के नीचे आकर 2.5 प्रतिशत लोगों ने जान दी। यह आंकड़े मानसिक स्वास्थ्य संकट की गंभीरता को भी सामने रखते हैं।

खेती से जुड़े मामलों में कुछ राहत

India Suicide Report 2024: खेती और कृषि क्षेत्र से जुड़े आत्महत्या मामलों में हालांकि कुछ गिरावट दर्ज की गई है। साल 2024 में खेती और कृषि क्षेत्र से जुड़े 10 हजार 546 लोगों ने आत्महत्या की, जो कुल मामलों का 6.2 प्रतिशत है। साल 2016 में यह हिस्सा 8.7 प्रतिशत था। एनसीआरबी ने खेती से जुड़े आत्महत्या आंकड़ों को अलग श्रेणी के रूप में पहली बार 2016 में शामिल किया था। रिपोर्ट के अनुसार 2024 में 4 हजार 633 किसानों और 5 हजार 913 कृषि मजदूरों ने आत्महत्या की।

आर्थिक और मानसिक संकट बनता जा रहा राष्ट्रीय चुनौती

India Suicide Report 2024: यह रिपोर्ट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह उस सामाजिक और आर्थिक दबाव की कहानी भी बताती है, जिससे देश का बड़ा वर्ग गुजर रहा है। दिहाड़ी मजदूरों में बढ़ती आत्महत्या यह संकेत देती है कि आर्थिक असमानता, अस्थिर रोजगार, सामाजिक असुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य जैसी समस्याएं अब गंभीर राष्ट्रीय चुनौती बन चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल आर्थिक सहायता पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि रोजगार की स्थिरता, सामाजिक सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में भी गंभीर प्रयास करने होंगे।


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Priyanka C. Mishra

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प्रियंका सी. मिश्रा वरिष्ठ हिंदी कंटेंट राइटर और पत्रकार हैं, जिन्हें समाचार लेखन, डिजिटल कंटेंट निर्माण, स्क्रिप्टिंग, रिपोर्टिंग और विश्लेषण के क्षेत्र में व्यापक अनुभव प्राप्त है। वे सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक विषयों के साथ-साथ बॉलीवुड, ज्योतिष, स्वास्थ्य और लाइफस्टाइल जैसे विविध विषयों पर तथ्यपरक और शोध आधारित लेखन करती हैं। जटिल मुद्दों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करना उनकी विशेषता है, जिससे उनकी सामग्री व्यापक पाठक वर्ग के लिए सहज और विश्वसनीय बनती है। अनुभव : हिंदी पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट इंडस्ट्री में कार्य करते हुए उन्होंने समाचार लेखन, फीचर स्टोरी, विश्लेषणात्मक लेख और यूट्यूब स्क्रिप्टिंग में मजबूत पहचान बनाई है। विभिन्न समसामयिक और जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता उन्हें एक बहुमुखी कंटेंट विशेषज्ञ के रूप में स्थापित करती है। वर्तमान फोकस : वे समाचार, सोशल ट्रेंड्स, एंटरटेनमेंट, ज्योतिष, स्वास्थ्य और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर डिजिटल ऑडियंस के लिए जानकारीपूर्ण और भरोसेमंद कंटेंट तैयार करती हैं। उनकी प्राथमिकता तथ्यों की सटीकता, निष्पक्ष प्रस्तुति और पाठकों के लिए उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराना है। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • समाचार लेखन और विश्लेषण : राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक विषयों पर स्पष्ट और संतुलित रिपोर्टिंग एवं विश्लेषण। • बॉलीवुड और एंटरटेनमेंट : फिल्म, सेलिब्रिटी और मनोरंजन जगत से जुड़े ट्रेंड्स और अपडेट्स पर लेखन। • ज्योतिष और लाइफस्टाइल : ज्योतिष, स्वास्थ्य, रिलेशनशिप और दैनिक जीवन से जुड़े विषयों पर सरल एवं उपयोगी कंटेंट निर्माण। • यूट्यूब स्क्रिप्टिंग और डिजिटल कंटेंट : डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आकर्षक, ऑडियंस-केंद्रित और रिसर्च आधारित स्क्रिप्ट तैयार करने में विशेषज्ञता। • हिंदी कंटेंट निर्माण : सरल, प्रभावी और SEO-फ्रेंडली हिंदी कंटेंट तैयार करने का अनुभव। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, निष्पक्ष दृष्टिकोण और संवेदनशील लेखन शैली के कारण प्रियंका सी. मिश्रा ने पाठकों के बीच एक विश्वसनीय हिंदी कंटेंट राइटर और डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल के रूप में अपनी पहचान बनाई है। समाचार और डिजिटल मीडिया के प्रति उनकी प्रतिबद्धता तथा विविध विषयों पर निरंतर लेखन अनुभव उनकी विशेषज्ञता और विश्वसनीयता को मजबूत बनाता है।