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रांची: रिम्स पहुंचीं CID की दो विशेष टीम, नामांकन और टेंडर गड़बड़ी की जांच तेज, खंगाले जा रहे दस्तावेज

रांची: रिम्स पहुंचीं CID की दो विशेष टीम, नामांकन और टेंडर गड़बड़ी की जांच तेज, खंगाले जा रहे दस्तावेज
रांची: रिम्स पहुंचीं CID की दो विशेष टीम, नामांकन और टेंडर गड़बड़ी की जांच तेज (File Photo)

रांची स्थित रिम्स में नामांकन और टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सीआईडी ने जांच तेज कर दी है। बुधवार को दो विशेष जांच टीमें संस्थान पहुंचीं और दस्तावेजों की पड़ताल शुरू की। शिकायतों में प्रवेश प्रक्रिया और टेंडर आवंटन में नियमों की अनदेखी के आरोप लगाए गए हैं।

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Dipali Kumari
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RIMS Ranchi News: रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में नामांकन और टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच अब तेज हो गई है। इसी बीच आज बुधवार सुबह अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की दो विशेष जांच टीमें रिम्स पहुंचीं और विभिन्न विभागों में जांच शुरू कर दी। एडीजी CID के निर्देश पर गठित इन टीमों ने डीन कार्यालय, डेटा सेंटर और अन्य महत्वपूर्ण शाखाओं में पहुंचकर दस्तावेजों और रिकॉर्ड की पड़ताल शुरू की है।

क्या है पूरा मामला ?

सूत्रों के अनुसार, रिम्स में पिछले शैक्षणिक सत्र के दौरान हुए नामांकन को लेकर कई शिकायतें मिली थीं। आरोप है कि प्रवेश प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई और कुछ ऐसे अभ्यर्थियों को भी दाखिला दिया गया, जो निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरते थे। इन शिकायतों के आधार पर CID ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की है।

नामांकन  संबंधित फाइलों की जांच कर रही टीम

जांच टीम ने सबसे पहले डीन कार्यालय का निरीक्षण किया और नामांकन से संबंधित फाइलों की जांच की। इसके साथ ही कंप्यूटर डेटा, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों का भी सत्यापन किया जा रहा है। जांच में तकनीकी पहलुओं को समझने और साक्ष्यों का विश्लेषण करने के लिए विशेषज्ञों की टीम भी CID अधिकारियों के साथ मौजूद है।

सूत्रों का कहना है कि जांच के दौरान जो भी दस्तावेज संदिग्ध पाए जा रहे हैं, उन्हें टीम अपने कब्जे में ले रही है। इसके अलावा संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ भी की जा रही है, ताकि शिकायतों की सच्चाई का पता लगाया जा सके। CID की टीम यह जानने का प्रयास कर रही है कि कहीं नामांकन प्रक्रिया में किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ।

टेंडर आवंटन पर उठे सवाल

नामांकन के अलावा रिम्स में टेंडर प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। आरोप है कि कुछ टेंडर आवंटन में पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया और नियमों की अनदेखी की गई। यही कारण है कि जांच का दायरा सिर्फ प्रवेश प्रक्रिया तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि खरीद और टेंडर से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।

गौरतलब है कि रिम्स में टेंडर से जुड़ी अनियमितताओं के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। पूर्व में मेडिकल उपकरणों की खरीद में कथित घोटालों की जांच हुई थी, जिसमें कई गड़बड़ियां उजागर हुई थीं। ऐसे में नए आरोपों ने संस्थान की कार्यप्रणाली पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब सभी की नजर CID जांच पर टिकी है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।