अब नागपुर के सरकारी पुस्तकालय से घर ले जा सकेंगे लाखों किताबें, जानें कैसे

नागपुर के शासकीय विभागीय ग्रंथालय की नई पुस्तकालयाध्यक्ष मीनाक्षी कांबले ने संभाला कार्यभार। 2.63 लाख किताबों का भंडार, सदस्यता और नियमों की पूरी जानकारी।
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मीनाक्षी कांबले ने संभाली कमान
नागपुर के शासकीय विभागीय ग्रंथालय में अब पाठकों को बेहतर सेवाएं मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। गोंदिया जिला ग्रंथालय से स्थानांतरित होकर आईं श्रीमती मीनाक्षी कांबले ने हाल ही में शासकीय विभागीय ग्रंथालय के पुस्तकालयाध्यक्ष पद का कार्यभार संभाल लिया है। पदभार संभालते ही उन्होंने नागपुर के नागरिकों, विद्यार्थियों और पुस्तक प्रेमियों से ग्रंथालय की समृद्ध पुस्तक-संपदा का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की है।
2.63 लाख से अधिक पुस्तकें और पत्रिकाएं उपलब्ध
पुस्तकालयाध्यक्ष मीनाक्षी कांबले ने बताया कि इस ग्रंथालय में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के साथ-साथ स्कूली व कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए विशेष अध्ययन सामग्री उपलब्ध है। इसके अलावा यहाँ कहानी, कविता संग्रह, उपन्यास, जीवनियां, विभिन्न ज्ञानवर्धक पत्रिकाएं और अन्य अवांतर पठन सामग्री भी मौजूद है। वर्तमान में इस सरकारी पुस्तकालय में कुल 2,63,935 पुस्तकों और ग्रंथों का विशाल संग्रह है।
सदस्यता लेने की आसान प्रक्रिया
ग्रंथालय का नियमित सदस्य बनने के इच्छुक पाठकों को एक निर्धारित आवेदन फॉर्म भरना होगा। इसके साथ दो साल के लिए 100 रुपये प्रवेश शुल्क और 500 रुपये डिपॉजिट के रूप में नकद जमा करनी होती है। आवेदन पत्र के साथ संलग्न हमीपत्र पर किसी राजपत्रित अधिकारी, स्कूल-कॉलेज के प्रमुख या संबंधित कार्यालय प्रमुख के हस्ताक्षर होना अनिवार्य है।
14 दिनों के लिए घर ले जा सकते हैं किताबें
ग्रंथालय के पंजीकृत सदस्यों को घर पर एकाग्रता से अध्ययन करने की सुविधा भी दी जाती है। इसके तहत सदस्य एक बार में 14 दिनों की अवधि के लिए एक पुस्तक अपने घर ले जा सकते हैं।
युवाओं और पाठकों से विशेष अपील
श्रीमती कांबले ने नागपुर जिले के सभी नागरिकों, विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं तथा पुस्तक प्रेमियों से इस समृद्ध ग्रंथ-संपदा का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ग्रंथालय में उपलब्ध विविध प्रकार की पुस्तकें ज्ञानवृद्धि, अध्ययन तथा व्यक्तित्व विकास के लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं। नागरिकों को नियमित रूप से ग्रंथालय का उपयोग कर पढ़ने की आदत विकसित करनी चाहिए।
रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र
एडिट: शिंकी सिंह

