Nagpur News: नक्सलवाद की मार आदिवासियों और जवानों ने झेली, दत्ता शिर्के ने संजय राऊत पर साधा निशाना

Nagpur Naxalism tribal impact Datta Shirke statement: जन संघर्ष समिति के अध्यक्ष दत्ता शिर्के ने कहा कि नक्सलवाद की सबसे गंभीर मार आदिवासी समाज ने झेली है और कई जवान भी हिंसा में शहीद हुए हैं। उन्होंने संजय राऊत से खोखली बयानबाजी बंद करने को कहा। शिर्के के अनुसार आदिवासियों को बंदूक और हिंसा नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क, पानी और सुरक्षित जीवन चाहिए।
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नक्सली हिंसा की सबसे गंभीर मार आदिवासी परिवारों ने झेली
Nagpur Naxalism tribal impact Datta Shirke statement: नागपुर। जन संघर्ष समिति के अध्यक्ष दत्ता शिर्के ने कहा है कि नक्सलवाद की सबसे पहली और सबसे गंभीर मार आदिवासी समाज ने ही झेली है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर नक्सलवाद किसके लिए जरूरी है, और कहा कि यह सवाल एक बार अबूझमाड़, बस्तर और गड़चिरोली के दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासियों से पूछा जाना चाहिए।
शिर्के के अनुसार, नक्सली हिंसा के कारण अनेक आदिवासी महिलाओं ने अपने पति, बच्चों ने पिता और परिवारों ने अपने परिजनों को खोया है। उन्होंने सिलगेर-सुकमा के लक्ष्मण बारसे की घटना का जिक्र करते हुए बताया कि बच्चों को शिक्षा देने वाले इस शिक्षादूत की वर्ष 2025 में माओवादियों द्वारा कथित हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद उनकी पत्नी और दो छोटे बच्चे बेसहारा रह गए।
उन्होंने यह भी कहा कि नक्सली हिंसा के शिकार सिर्फ आदिवासी ही नहीं, बल्कि पुलिस और सीआरपीएफ (CRPF) जवान भी हुए हैं। उन्होंने वर्ष 2017 में सुकमा में हुए माओवादी हमले का उदाहरण दिया, जिसमें 25 सीआरपीएफ (CRPF) जवान शहीद हुए थे।
आदिवासियों को बंदूक नहीं, शिक्षा और रोजगार चाहिए
दत्ता शिर्के ने संजय राऊत पर निशाना साधते हुए कहा, “दिल्ली-मुंबई में बैठकर नक्सलवाद के समर्थन में नारे लगाना आसान है, लेकिन नक्सलपीड़ित आदिवासी परिवारों के दुख के सामने खड़ा होना कठिन है।” उन्होंने आदिवासियों के नाम पर राजनीति न करने की अपील करते हुए कहा कि आदिवासियों को नक्सलवाद नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क, पानी और सुरक्षित जीवन चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि नक्सलवादियों ने आदिवासियों के अधिकारों के लिए कोई ठोस काम किया है, तो उसका एक उदाहरण दिया जाए। “आदिवासियों के हाथों में बंदूक नहीं, बल्कि किताब, रोजगार और विकास के अवसर दिए जाने चाहिए,” उन्होंने कहा।
जन संघर्ष समिति के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रिया शुरू हो गई है, संजय राऊत की ओर से अब तक कोई जवाब नहीं आया है।
रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र

