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गंगा घाटों पर कन्वेयर बेल्ट से होगा प्रतिमा विसर्जन, नगरपालिकाओं से मांगी गई रिपोर्ट

गंगा घाटों पर कन्वेयर बेल्ट से होगा प्रतिमा विसर्जन, नगरपालिकाओं से मांगी गई रिपोर्ट
Ganga ghat conveyor belt idol immersion: गंगा घाटों पर प्रतिमा विसर्जन को व्यवस्थित करने की तैयारी है। नगर एवं शहरी विकास विभाग ने कन्वेयर बेल्ट लगाने के लिए नगरपालिकाओं से रिपोर्ट और खर्च का ब्योरा मांगा है। (Image : AI)

गंगा घाटों पर प्रतिमा विसर्जन को व्यवस्थित करने की तैयारी है। नगर एवं शहरी विकास विभाग ने कन्वेयर बेल्ट लगाने के लिए नगरपालिकाओं से रिपोर्ट और खर्च का ब्योरा मांगा है।

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Shinki Singh
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विसर्जन के बाद प्रतिमाओं को निकालने के लिए क्रेन जरूरी

पश्चिम बंगाल के विभिन्न शहरी इलाकों में प्रतिमा विसर्जन को अधिक व्यवस्थित और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। नगर एवं शहरी विकास विभाग ने राज्य की नगरपालिकाओं, डेवलपमेंट बोर्ड और जिलाधिकारियों को निर्देश भेजकर विसर्जन घाटों पर कन्वेयर बेल्ट लगाने की संभावनाएं तलाशने को कहा है। इसके साथ ही प्रत्येक क्षेत्र में इसकी जरूरत और संभावित खर्च का पूरा ब्योरा भी मांगा गया है।

हर घाट की क्षमता के अनुसार तैयार होगी व्यवस्था

विभाग की ओर से भेजे गए निर्देश में कहा गया है कि शहरों, शहर से सटे इलाकों और अन्य अर्बन एरिया में जहां प्रतिमाओं का विसर्जन होता है वहां घाटों की स्थिति के अनुसार व्यवस्था तैयार की जाए। संबंधित नगरपालिका और जिला प्रशासन को यह बताना होगा कि उनके क्षेत्र में कितने विसर्जन घाट हैं, किन घाटों पर कन्वेयर बेल्ट की जरूरत होगी और इसे लगाने में कितना खर्च आएगा। नगर एवं शहरी विकास विभाग को रिपोर्ट मिलने के बाद उसी आधार पर वित्तीय मंजूरी देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। विभाग का लक्ष्य है कि विसर्जन के दौरान भीड़ और अव्यवस्था कम हो तथा प्रतिमाओं को सुरक्षित तरीके से पानी तक पहुंचाया जा सके।

बड़े घाटों पर कन्वेयर बेल्ट को लेकर चुनौती

कोलकाता के बाबूघाट, बाजेकदमतला और नबातल्ला जैसे बड़े घाटों पर इस व्यवस्था को लागू करना आसान नहीं माना जा रहा है। इन घाटों का आकार बड़ा होने के कारण लंबी कन्वेयर बेल्ट लगाने में तकनीकी और आर्थिक दोनों तरह की दिक्कतें आ सकती हैं। कोलकाता नगर निगम के अधिकारियों के स्तर पर कन्वेयर बेल्ट के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है। इसमें लोहे की ट्रॉली का इस्तेमाल करने का सुझाव सामने आया है। हालांकि अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है।

क्रेन से तुरंत निकाली जाएंगी प्रतिमाएं

प्रतिमा के पानी में गिरने के बाद उसे जल्द बाहर निकालना भी जरूरी माना जा रहा है। पर्यावरण प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए घाटों पर क्रेन की व्यवस्था बनाए रखने पर भी जोर दिया जा रहा है। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों की ओर से राज्य सचिवालय को जानकारी दी गई है। कन्वेयर बेल्ट से जुड़ी पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए नगर एवं शहरी विकास विभाग ने दो नोडल अधिकारियों को जिम्मेदारी दी है। इनमें विभाग के विशेष सचिव देवप्रिय विश्वास और केएमडीए के मुख्य अभियंता सुमन साहा शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक विभिन्न नगरपालिकाओं से प्रस्ताव आने शुरू हो गए हैं। किन-किन घाटों पर कितनी कन्वेयर बेल्ट की जरूरत होगी और इसके लिए कितना बजट चाहिए इसका अंतिम आकलन होने में अभी कुछ दिन लग सकते हैं।


रिपोर्ट: शिंकी सिंह, कोलकाता

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शिंकी सिंह (Shinki Singh) पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग एक दशक का अनुभव रखती हैं। उन्होंने वर्ष 2017 में दैनिक सन्मार्ग से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जहाँ कई वर्षों तक फील्ड रिपोर्टिंग और न्यूज़ डेस्क की जिम्मेदारियाँ निभाईं। इस दौरान उन्होंने राजनीति, सामाजिक सरोकारों, महिला मुद्दों और जनहित से जुड़े विषयों पर व्यापक रिपोर्टिंग की। इसके साथ ही न्यूज़ एंकरिंग और वीडियो एडिटिंग का व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त किया, जिससे डिजिटल और मल्टीमीडिया पत्रकारिता की उनकी समझ और अधिक सशक्त हुई। इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर से जुड़कर हार्ड न्यूज़, समसामयिक घटनाओं और लाइफस्टाइल पत्रकारिता सहित विभिन्न विषयों पर रिपोर्टिंग और लेखन किया। तथ्यपरक, निष्पक्ष और संतुलित पत्रकारिता में विश्वास रखते हुए वे प्रत्येक समाचार को विश्वसनीय स्रोतों, तथ्यों के सत्यापन और गहन अध्ययन के आधार पर प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देती हैं। वर्तमान में शिंकी सिंह राष्ट्र भारत से जुड़ी हैं, जहाँ वे राष्ट्रीय, राजनीतिक, सामाजिक और जनहित से जुड़े विषयों पर समाचार, विश्लेषण और विशेष रिपोर्ट तैयार कर रही हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक, प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना है। शैक्षणिक रूप से उन्होंने महार्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU), रोहतक से बी.एड. की शिक्षा प्राप्त की है। इसके अतिरिक्त इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से इतिहास एवं अंग्रेज़ी विषयों में स्नातकोत्तर (Master's) की डिग्री हासिल की है। वे पत्रकारिता में निरंतर सीखने, बदलते मीडिया परिदृश्य के अनुरूप स्वयं को अपडेट रखने तथा तथ्यों की पुष्टि के बाद ही समाचार प्रकाशित करने में विश्वास रखती हैं।