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नागपुर ईवीएम विरोध: भारत मुक्ति मोर्चा और ओबीसी मोर्चा का जेल भरो आंदोलन, उठी जातिगत जनगणना और आरक्षण की मांग

Nagpur EVM Protest
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Asfi Shadab
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नागपुर के संविधान चौक पर आज एक ऐतिहासिक आंदोलन देखने को मिला। Nagpur EVM Protest के तहत भारत मुक्ति मोर्चा (Bharat Mukti Morcha) और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा (OBC Morcha) ने संयुक्त रूप से Jail Bharo Andolan आयोजित किया।

इस आंदोलन का केंद्र बिंदु था—EVM हटाकर बैलेट पेपर लागू करना, Caste Census की मांग को जोरदार तरीके से उठाना, Reservation in Promotion लागू करना और Mob Lynching जैसी घटनाओं को रोकना।

क्यों हुआ Nagpur EVM Protest?

आंदोलनकारियों का मानना है कि Electronic Voting Machine (EVM) में पारदर्शिता की कमी है और इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर जनता का भरोसा कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा कि बैलेट पेपर ही सबसे सुरक्षित और पारदर्शी प्रणाली है, जिसे पुनः लागू किया जाना चाहिए। यह मांग केवल विपक्ष की नहीं बल्कि सामाजिक और जनआंदोलन संगठनों की भी प्राथमिक मांग बन चुकी है।

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Caste Census की मांग तेज

Nagpur EVM Protest में दूसरा बड़ा मुद्दा था Caste Census। आंदोलनकारियों ने कहा कि जातिगत जनगणना ही वास्तविक सामाजिक न्याय की आधारशिला है। जब तक सभी जातियों की सटीक गणना नहीं होगी, तब तक सही तरीके से आरक्षण और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज तक नहीं पहुंच सकेगा।

Reservation in Promotion पर जोर

SC-ST और OBC कर्मचारियों के लिए Reservation in Promotion आंदोलन का प्रमुख हिस्सा रहा। संगठनों ने कहा कि सरकार को तुरंत इस नीति को लागू करना चाहिए ताकि समान अवसर और सामाजिक न्याय सुनिश्चित हो सके।

Minority Rights और Mob Lynching का मुद्दा

प्रदर्शनकारियों ने मुस्लिम समुदाय के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया और कहा कि बढ़ती Mob Lynching की घटनाएं लोकतंत्र और संविधान पर गंभीर हमला हैं। आंदोलन ने सरकार से मांग की कि इस पर सख्त कानून बनाकर दोषियों को कड़ी सज़ा दी जाए।

वेब स्टोरी:

गिरफ्तारी और Jail Bharo Movement

संविधान चौक पर विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस ने कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया और उन्हें सीताबाड़ी पुलिस स्टेशन ले जाया गया। हालांकि गिरफ्तारी के बावजूद कार्यकर्ताओं ने Jail Bharo Movement को जारी रखा और नारेबाजी के जरिए अपनी आवाज बुलंद की।

यह Nagpur EVM Protest न केवल महाराष्ट्र बल्कि देशभर में सामाजिक न्याय और लोकतंत्र की सुरक्षा की दिशा में एक अहम संदेश छोड़ गया।

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