सिनीयर भोंसला पैलेस में 298वें वर्ष हुआ गणपति बप्पा का विसर्जन, 300 साल पुरानी परंपरा कायम

नागपुर के सिनीयर भोंसला पैलेस में 298वें वर्ष गणपति बप्पा का विसर्जन ।1728 से चली आ रही ऐतिहासिक परंपरा जानें पूरी जानकारी।
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शाही अंदाज में पालकी में निकली गणपति प्रतिमा
नागपुर राज्य के संस्थापक तथा सेनासाहेब सुभा श्रीमंत राजे रघुजी महाराज भोंसले (प्रथम) के शासनकाल से वर्ष 1728 से चली आ रही परंपरा के अनुसार, महल स्थित श्रीमंत राजे मुधोजी महाराज भोंसले के सिनीयर भोसला पैलेस में स्थापित गणपति बप्पा का इस वर्ष 298वें वर्ष में विधि-विधान के साथ विसर्जन किया गया। गणेशोत्सव के सातवें दिन दशमी तिथि पर भगवान श्री गणेश की प्रतिमा को पालखी में विराजमान कर विसर्जन के लिए ले जाया गया।
करीब तीन शताब्दियों पुरानी परंपरा
इस ऐतिहासिक गणपति उत्सव की अपनी खास परंपराएं हैं, जो करीब तीन शताब्दियों से लगातार चली आ रही हैं। भोंसले कालीन परंपरा और संस्कृति की झलक इस गणपति की सजावट और श्रृंगार में देखने को मिलती है।
298 साल से एक जैसी है पोशाक
इस गणपति की सबसे खास बात यह है कि पिछले 298 वर्षों से भगवान श्री गणेश को एक ही आकार और एक ही रंग की पारंपरिक पोशाक धारण कराई जाती है। गणपति बप्पा को नागपुरकर भोंसले कालीन सिरपेंच-तुरा वाली पारंपरिक पगड़ी पहनाई जाती है। यह परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी कायम है और आज भी उसी श्रद्धा एवं रीति-रिवाज के साथ इसका पालन किया जाता है।
पालकी में निकाली गई शोभायात्रा
श्री गणेश की प्रतिमा को उत्सव के दौरान पालकी में विराजमान कर लाया जाता है। इसी तरह विसर्जन के दिन भी बप्पा को पालखी में ही विराजमान कर विसर्जन स्थल तक ले जाया जाता है। पालकी में गणपति बप्पा की शोभायात्रा निकलने के दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों और धार्मिक परंपराओं का पालन किया गया। करीब 298 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा नागपुर के भोंसलेकालीन इतिहास, संस्कृति और धार्मिक विरासत का अहम हिस्सा मानी जाती है। गणपति विसर्जन के मौके पर श्रद्धालुओं ने भगवान श्री गणेश के दर्शन किए और परंपरागत तरीके से बप्पा को विदाई दी।
रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र
एडिट: शिंकी सिंह

