Abhishek Banerjee: अभिषेक बनर्जी को मिला 30 नवंबर तक का कानूनी संरक्षण

Abhishek Banerjee: तीन मामलों में घिरे अभिषेक बनर्जी को कोर्ट से बड़ी राहत। इस मामले की अगली सुनवाई आगामी 23 तारीख को निर्धारित की गई है।
विषयसूची
सांसद अभिषेक बनर्जी के मामलों में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
Abhishek Banerjee : पश्चिम बंगाल तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने भवानीपुर, कालीतल्ला और बिष्णुपुर थानों में दर्ज तीन मामलों में सांसद को अंतरिम संरक्षण प्रदान किया है। न्यायमूर्ति सौगत भाटाचार्य की अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस सुरक्षा की मियाद आगामी 30 नवंबर तक रहेगी। इसका मतलब यह है कि इस तय समय सीमा तक सांसद के खिलाफ कोई भी कठोर दंडात्मक कार्रवाई या गिरफ्तारी नहीं की जा सकेगी। इस मामले की अगली सुनवाई आगामी 23 तारीख को निर्धारित की गई है।
अभिषेक बनर्जी को मिली बड़ी कानूनी सुरक्षा
सुनवाई के दौरान अभिषेक बनर्जी के वकील शंकर नारायण ने अदालत के सामने यह सवाल उठाया था कि क्या ये मामले उनके मु मु मुक्किल की विदेश यात्रा में किसी तरह की बाधा बन सकते हैं। उन्होंने बताया कि अभी तक उनके मुक्किल को डॉक्टर का अपॉइंटमेंट नहीं मिल पाया है जिसके कारण उनकी विदेश यात्रा में थोड़ी देर हुई है। इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की सभी शर्तों का पालन किया जाता है तो इन आपराधिक मामलों का उनकी विदेश यात्रा पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
विदेश यात्रा और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का असर
इससे पहले विदेश जाने की अनुमति मांगने वाली अभिषेक बनर्जी की याचिका कलकत्ता हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति जयमान्य बागची की पीठ ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा था कि केवल मुकदमे दर्ज होने के आधार पर किसी व्यक्ति को विदेश में जाकर अपने पसंद का इलाज कराने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। शीर्ष अदालत ने उन्हें तीन सप्ताह के लिए विदेश जाकर इलाज कराने की अनुमति दी थी।
जांच में सहयोग की शर्त और पुलिस का नोटिस
यद्यपि अदालत ने अभिषेक बनर्जी को गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान की है लेकिन इसके साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि उन्हें जांच प्रक्रिया में पूरा सहयोग करना होगा। जांच एजेंसियां या पुलिस अधिकारी पूछताछ के लिए उन्हें समन भेज सकते हैं बशर्ते इसके लिए सांसद को कम से कम 48 घंटे पहले विधिवत नोटिस देना अनिवार्य होगा। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस अंतरिम राहत से सांसद को बड़ी कानूनी राहत मिली है हालांकि आगामी सुनवाई में मामले की स्थिति और स्पष्ट होगी।
रिपोर्ट: शिंकी सिंह, कोलकाता

