Rashtra Bharat Logo

चांद के इशारे पर नहीं नाचता समुद्र!, 10 मीटर तक उठता है ज्वार

चांद के इशारे पर नहीं नाचता समुद्र!, 10 मीटर तक उठता है ज्वार
Ocean Tides: चांद के इशारे पर नहीं नाचता समुद्र!, 10 मीटर तक उठता है ज्वार ( Image - AI )

कहीं समुद्र 10 मीटर से ज्यादा ऊपर उठता है तो कहीं ज्वार मामूली रहता है। जानिए इसके पीछे चांद, समुद्र की बनावट और बदलती जलवायु का क्या असर है।

Updated:
·by
Priyanka C. Mishra
Priyanka C. Mishra
Share:

विषयसूची

Ocean Tides
Ocean Tides ( image – https://emerald.cruises/US/en-US/tours/e01o ) – Australia’s Kimberley Coast

गर्म होती धरती ने बदल दिया पूरा खेल

समुद्र में ज्वार-भाटा सिर्फ चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण का खेल नहीं है। समुद्र की गहराई, तट की बनावट और समुद्र के भीतर बनने वाली तरंगें भी तय करती हैं कि किसी जगह ज्वार कितना ऊंचा उठेगा। अब जलवायु परिवर्तन के कारण गर्म होते महासागर और बढ़ता समुद्र स्तर इस प्राकृतिक प्रक्रिया को भी प्रभावित कर रहे हैं।

दुनिया के कुछ हिस्सों में समुद्र का जलस्तर ज्वार के दौरान मामूली रूप से ऊपर-नीचे होता है, जबकि कुछ जगहों पर हाई टाइड और लो टाइड के बीच कई मीटर का अंतर देखने को मिलता है। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के किम्बर्ली तट पर यह अंतर 10 मीटर से भी अधिक हो सकता है। कनाडा की बे ऑफ फंडी में ज्वारीय अंतर करीब 16 मीटर तक पहुंच सकता है। आखिर एक ही ग्रह पर समुद्र के ज्वार में इतना बड़ा अंतर क्यों है? वैज्ञानिकों के अनुसार, इसका जवाब केवल चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण में नहीं छिपा है।

चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण सबसे बड़ा कारक

पृथ्वी पर समुद्री ज्वार मुख्य रूप से चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण से बनते हैं। सूर्य चंद्रमा से बहुत अधिक विशाल है, लेकिन वह पृथ्वी से बहुत दूर है। इसके विपरीत चंद्रमा पृथ्वी के काफी करीब है, इसलिए समुद्री ज्वार पर उसका प्रभाव ज्यादा होता है। चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी के हर हिस्से पर समान नहीं होता।

पृथ्वी के चंद्रमा की ओर वाले हिस्से पर इसका प्रभाव अधिक होता है, जबकि दूसरी ओर इसका प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहता है। पानी चट्टानों की तुलना में ज्यादा आसानी से गतिशील होता है, इसलिए यह अंतर समुद्र में ज्वारीय उभार के रूप में स्पष्ट दिखाई देता है। पृथ्वी के घूमने के साथ अलग-अलग क्षेत्र इन ज्वारीय उभारों से गुजरते हैं। इसी वजह से दुनिया के कई हिस्सों में एक दिन में दो हाई टाइड और दो लो टाइड देखने को मिलती हैं।

सूर्य भी बदलता है ज्वार की ताकत

सूर्य भी पृथ्वी पर ज्वार पैदा करता है। जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी लगभग एक सीध में होते हैं, तो दोनों के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव एक-दूसरे को मजबूत करते हैं। इस स्थिति को स्प्रिंग टाइड कहा जाता है। इसमें हाई टाइड और लो टाइड के बीच अंतर सामान्य से ज्यादा होता है। इसके उलट जब सूर्य और चंद्रमा पृथ्वी से देखने पर लगभग समकोण पर होते हैं, तो दोनों के प्रभाव आंशिक रूप से एक-दूसरे को कम करते हैं। इसे नीप टाइड कहा जाता है और इस दौरान ज्वारीय अंतर अपेक्षाकृत कम होता है।

Ocean Tides
Ocean Tides ( Image – AI )

समुद्र की भौगोलिक बनावट करती है बड़ा फर्क

वास्तविक समुद्र में ज्वार का व्यवहार उस सरल तस्वीर से काफी अलग है जिसमें पानी को केवल दो बड़े उभारों के रूप में देखा जाता है। महाद्वीप महासागरों को अलग-अलग बेसिन में बांटते हैं और पानी इन बेसिनों के भीतर अलग-अलग तरीके से घूमता है। कई समुद्री बेसिनों में ऐसे बिंदु होते हैं जहां ज्वार के कारण समुद्र के स्तर में बदलाव लगभग नहीं होता। इन्हें अम्फिड्रोमिक पॉइंट्स कहा जाता है। इन बिंदुओं से दूर जाने पर ज्वारीय अंतर आमतौर पर बढ़ता जाता है। तट की आकृति भी ज्वार को काफी बढ़ा सकती है। इसका एक महत्वपूर्ण कारण रेजोनेंस है।

हर खाड़ी और समुद्री बेसिन की अपनी प्राकृतिक लय होती है। जब यह लय स्थानीय ज्वार की लय से मेल खाती है, तो पानी की हर अगली गति पिछली गति को और मजबूत कर देती है। इसी तरह की प्रक्रिया पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के किम्बर्ली तट और कनाडा की Bay of Fundy में बड़े ज्वार के पीछे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

समुद्र के नीचे छिपे पहाड़ भी हैं जिम्मेदार

ज्वार को प्रभावित करने वाली एक और महत्वपूर्ण चीज समुद्र की तलहटी है। समुद्र के भीतर मौजूद पहाड़, रिज और असमान सतह जब ज्वारीय प्रवाह के रास्ते में आते हैं तो ज्वार की कुछ ऊर्जा समुद्र के भीतर बनने वाली तरंगों में बदल जाती है। इन्हें इंटरनल टाइड्स कहा जाता है। इंडोनेशियाई द्वीपसमूह का जटिल समुद्री तल ऐसी शक्तिशाली आंतरिक ज्वारीय तरंगों का निर्माण करता है। जब ये तरंगें टूटती हैं तो समुद्र में मिश्रण बढ़ सकता है, जिससे गर्मी और पोषक तत्वों के वितरण में मदद मिलती है।

कुछ आंतरिक ज्वारीय तरंगें अपने बनने की जगह के आसपास ही टूट जाती हैं, जबकि कुछ हजारों किलोमीटर तक यात्रा कर सकती हैं। इस दौरान वे सतही ज्वार की ऊर्जा को प्रभावित करती हैं। उनका प्रभाव कभी ज्वार को धीमा करने वाले ब्रेक जैसा और कभी स्प्रिंग जैसा हो सकता है, जो ऊर्जा को एक चरण में लेकर दूसरे चरण में वापस देता है।

अब जलवायु परिवर्तन भी बदल रहा है ज्वार का स्वरूप

वैज्ञानिकों के मुताबिक, ज्वार कोई पूरी तरह स्थिर प्राकृतिक प्रक्रिया नहीं है। जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र का स्तर बढ़ रहा है, तटरेखाएं बदल रही हैं और ऊपरी महासागर गर्म हो रहा है। साथ ही समुद्र में स्ट्रैटिफिकेशन यानी अलग-अलग तापमान और घनत्व वाली परतों का विभाजन बढ़ रहा है। इन बदलावों का असर ज्वार के आकार और उसकी ऊर्जा के वितरण पर पड़ सकता है। वैज्ञानिकों को पहले से ऐसे माप मिले हैं जो कुछ क्षेत्रों में ज्वारीय बदलाव का संकेत देते हैं। बेहतर समुद्री मॉडल और नए उपग्रह अब उन जटिल तटीय क्षेत्रों में भी ज्वार को मापने में मदद कर रहे हैं, जहां पहले अंतरिक्ष से निगरानी करना मुश्किल था।

बढ़ते ज्वार का मतलब बढ़ सकता है बाढ़ का खतरा

ज्वार में बदलाव का असर सिर्फ समुद्र विज्ञान तक सीमित नहीं है। तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए इसका सीधा संबंध बाढ़ के जोखिम से है। ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया राज्य में स्थित Lakes Entrance इसका एक उदाहरण है। वहां ज्वारीय सीमा में बदलाव को बढ़ती बाढ़ के प्रमुख कारणों में बताया गया है। स्थानीय प्रशासन घरों और कारोबारों की सुरक्षा के लिए ड्रेनेज व्यवस्था में सुधार की योजना पर काम कर रहा है। भविष्य में ज्वार किस तरह बदल सकते हैं, इसका बेहतर अनुमान तटीय समुदायों को बाढ़ के जोखिम के लिए तैयार होने, नुकसान कम करने और सुरक्षित तटीय विकास की योजना बनाने में मदद कर सकता है।

करीब तीन सदियों पहले आइजैक न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के जरिए ज्वार को समझाने की वैज्ञानिक नींव रखी थी। लेकिन आज वैज्ञानिकों के सामने एक नया सवाल है-जब महासागर खुद बदल रहे हैं, तो क्या उनके ज्वार भी बदलेंगे? शोध से संकेत मिलता है कि इसका जवाब हां हो सकता है। चंद्रमा और सूर्य ज्वार के मूल चालक जरूर हैं, लेकिन समुद्र की बदलती भौतिक और जलवायु परिस्थितियां यह तय कर सकती हैं कि भविष्य में दुनिया के अलग-अलग तटीय क्षेत्रों में ज्वार किस रूप में दिखाई देगा।


Rashtra Bharat
Rashtra Bharat पर पढ़ें ताज़ा खेल, राजनीति, विश्व, मनोरंजन, धर्म और बिज़नेस की अपडेटेड हिंदी खबरें।
Priyanka C. Mishra

Priyanka C. Mishra

प्रियंका सी. मिश्रा वरिष्ठ हिंदी कंटेंट राइटर और पत्रकार हैं, जिन्हें समाचार लेखन, डिजिटल कंटेंट निर्माण, स्क्रिप्टिंग, रिपोर्टिंग और विश्लेषण के क्षेत्र में व्यापक अनुभव प्राप्त है। वे सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक विषयों के साथ-साथ बॉलीवुड, ज्योतिष, स्वास्थ्य और लाइफस्टाइल जैसे विविध विषयों पर तथ्यपरक और शोध आधारित लेखन करती हैं। जटिल मुद्दों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करना उनकी विशेषता है, जिससे उनकी सामग्री व्यापक पाठक वर्ग के लिए सहज और विश्वसनीय बनती है। अनुभव : हिंदी पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट इंडस्ट्री में कार्य करते हुए उन्होंने समाचार लेखन, फीचर स्टोरी, विश्लेषणात्मक लेख और यूट्यूब स्क्रिप्टिंग में मजबूत पहचान बनाई है। विभिन्न समसामयिक और जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता उन्हें एक बहुमुखी कंटेंट विशेषज्ञ के रूप में स्थापित करती है। वर्तमान फोकस : वे समाचार, सोशल ट्रेंड्स, एंटरटेनमेंट, ज्योतिष, स्वास्थ्य और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर डिजिटल ऑडियंस के लिए जानकारीपूर्ण और भरोसेमंद कंटेंट तैयार करती हैं। उनकी प्राथमिकता तथ्यों की सटीकता, निष्पक्ष प्रस्तुति और पाठकों के लिए उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराना है। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • समाचार लेखन और विश्लेषण : राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक विषयों पर स्पष्ट और संतुलित रिपोर्टिंग एवं विश्लेषण। • बॉलीवुड और एंटरटेनमेंट : फिल्म, सेलिब्रिटी और मनोरंजन जगत से जुड़े ट्रेंड्स और अपडेट्स पर लेखन। • ज्योतिष और लाइफस्टाइल : ज्योतिष, स्वास्थ्य, रिलेशनशिप और दैनिक जीवन से जुड़े विषयों पर सरल एवं उपयोगी कंटेंट निर्माण। • यूट्यूब स्क्रिप्टिंग और डिजिटल कंटेंट : डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आकर्षक, ऑडियंस-केंद्रित और रिसर्च आधारित स्क्रिप्ट तैयार करने में विशेषज्ञता। • हिंदी कंटेंट निर्माण : सरल, प्रभावी और SEO-फ्रेंडली हिंदी कंटेंट तैयार करने का अनुभव। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, निष्पक्ष दृष्टिकोण और संवेदनशील लेखन शैली के कारण प्रियंका सी. मिश्रा ने पाठकों के बीच एक विश्वसनीय हिंदी कंटेंट राइटर और डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल के रूप में अपनी पहचान बनाई है। समाचार और डिजिटल मीडिया के प्रति उनकी प्रतिबद्धता तथा विविध विषयों पर निरंतर लेखन अनुभव उनकी विशेषज्ञता और विश्वसनीयता को मजबूत बनाता है।