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आज शाम आसमान में दिखेगा दुर्लभ ‘ब्लू मून’ का अद्भुत नजारा, जानिए भारत में देखने का सही समय

आज शाम आसमान में दिखेगा दुर्लभ ‘ब्लू मून’ का अद्भुत नजारा, जानिए भारत में देखने का सही समय
आज शाम आसमान में दिखेगा दुर्लभ 'ब्लू मून' का अद्भुत नजारा (Pic Credit- X @mansebanjaran)

मई महीने का आखिरी दिन आसमान प्रेमियों के लिए खास रहने वाला है। आज एक ही महीने में दूसरी पूर्णिमा पड़ने के कारण ब्लू मून दिखाई देगा। इस दुर्लभ खगोलीय घटना को लेकर लोगों में काफी उत्सुकता है। जानिए इसे कब, कहां और कैसे सबसे बेहतर तरीके से देखा जा सकता है।

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Dipali Kumari
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Blue Moon: आज 31 मई 2026 की शाम आसमान में एक बेहद खास और दुर्लभ खगोलीय घटना देखने को मिलेगी। इस घटना कोब्लू मून (Blue Moon) कहा जाता है। खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के साथ-साथ आम लोगों के लिए भी यह एक शानदार मौका है, क्योंकि ऐसा नजारा रोज-रोज देखने को नहीं मिलता। खास बात यह है कि इस अद्भुत चांद को देखने के लिए किसी दूरबीन या विशेष उपकरण की जरूरत नहीं होगी। इसे खुली आंखों से आसानी से देखा जा सकेगा।

क्या होता है ब्लू मून?

हालांकि, ब्लू मून नाम सुनकर कई लोगों को लगता है कि इस दिन चांद का रंग नीला दिखाई देगा, लेकिन ऐसा नहीं है। दरअसल, जब किसी एक कैलेंडर महीने में दो पूर्णिमा पड़ती हैं, तो दूसरी पूर्णिमा को ब्लू मून कहा जाता है। मई 2026 में पहली पूर्णिमा 1 मई को पड़ी थी और दूसरी पूर्णिमा आज यानी 31 मई को पड़ रही है। इसी वजह से आज की पूर्णिमा को ब्लू मून कहा जा रहा है।

आज का चांद होगा छोटा

इस बार का ब्लू मून एक और वजह से खास माना जा रहा है। इसे माइक्रो मून भी कहा जा रहा है। इसका कारण यह है कि आज चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी से अपेक्षाकृत अधिक दूरी पर रहेगा। ऐसे में यह सामान्य पूर्णिमा की तुलना में थोड़ा छोटा दिखाई दे सकता है। हालांकि यह अंतर खुली आंखों से आसानी से महसूस नहीं होगा।

कई लोगों को आज चांद सामान्य से बड़ा भी दिखाई दे सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह वास्तव में आंखों का भ्रम होता है। जब चंद्रमा पेड़ों, इमारतों या पहाड़ों के पास दिखाई देता है, तो हमारा दिमाग उसे अपेक्षाकृत बड़ा समझने लगता है, जबकि उसके वास्तविक आकार में कोई बदलाव नहीं होता।

आज शाम ऐसा दिखेगा चांद

आज शाम चंद्रमा का रंग हल्का नारंगी या लाल भी दिखाई दे सकता है। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण है। जब चंद्रमा क्षितिज के पास होता है, तब उसकी रोशनी को पृथ्वी के वायुमंडल की अधिक मोटी परत से होकर गुजरना पड़ता है। इस दौरान नीली रोशनी बिखर जाती है, जबकि लाल और नारंगी रंग की किरणें हमारी आंखों तक पहुंचती हैं। यही वजह है कि चांद का रंग लाल या नारंगी नजर आता है।

भारत में कितने बजे दिखेगा ब्लू मून

भारत में इस खगोलीय घटना को देखने का सबसे अच्छा समय सूर्यास्त के बाद शाम करीब 6:30 बजे से 7:30 बजे के बीच माना जा रहा है। इस दौरान दक्षिण-पूर्व दिशा में खुले आसमान वाले स्थान से चंद्रमा को आसानी से देखा जा सकता है।

आज चंद्रमा को अर्घ्य देने का महत्त्व

वहीं ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं में पूर्णिमा का विशेष महत्व माना जाता है। कई लोग इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं, मंत्र जाप करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना के लिए पूजा-पाठ करते हैं। ऐसे में आज का ब्लू मून वैज्ञानिक और आध्यात्मिक, दोनों ही दृष्टि से खास माना जा रहा है।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।