शुभेंदु अधिकारी का तीखा हमला, 34 साल के वामपंथी राज में भुला दी गई थीं सनातन परंपराएं

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 34 साल के वामपंथी शासन पर हमला बोलते हुए कहा कि उस दौर में सनातन परंपराओं को भुला दिया गया था तृणमूल सरकार पर भी साधा निशाना।
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गीता-हनुमान चालीसा की जगह मिलती थीं मार्क्स-लेनिन की किताबें
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर सांस्कृतिक और वैचारिक बहस तेज हो गई है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने वामपंथी शासनकाल पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि 34 साल के वामपंथी राज में राज्य की सनातन परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौर में परंपरावादी सोच और आस्था को हाशिए पर धकेल दिया गया जिसका असर आज भी बंगाल के समाज में देखने को मिलता है।
सनातन परंपराओं को भूलने का आरोप
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि 34 साल के वामपंथी ‘लाल राज’ ने लोगों को आरती, पुष्पांजलि और प्रसाद जैसी सनातन परंपराओं से दूर कर दिया था। उनके मुताबिक, उस दौर में धार्मिक आस्था को खुलेआम व्यक्त करना भी मुश्किल हो गया था।
दुर्गा पूजा और महालया पर तंज
उन्होंने कहा कि उस दौरान पंडालों में न तो ‘दुर्गा पूजा’ लिखने की संस्कृति थी और न ही महालया सुनने का माहौल। पंडालों में प्रवेश कर आरती करने या हाथों में फूल लेकर मंत्रोच्चार करने पर अघोषित रोक जैसी स्थिति थी। शुभेंदु के अनुसार यह सिर्फ धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं था बल्कि आम जनजीवन में भी परंपराओं को दबाने की कोशिश की गई।
पुस्तकों और विचारधारा पर निशाना
वामपंथी कैंपों और दफ्तरों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां स्वामी विवेकानंद, रामकृष्ण मिशन या भारत सेवाश्रम संघ की किताबें नहीं मिलती थीं। वहां सिर्फ कार्ल मार्क्स और लेनिन की किताबें होती थीं। उन्होंने कहा कि लाख कोशिश करने के बाद भी भगवद्गीता या हनुमान चालीसा जैसी धार्मिक पुस्तकें वहां उपलब्ध नहीं होती थीं जो उस दौर की वैचारिक सोच को दर्शाता है।
तृणमूल सरकार पर भी साधा निशाना
वामकाल के बाद पिछले 15 सालों का जिक्र करते हुए शुभेंदु ने तृणमूल कांग्रेस पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि इन 15 वर्षों में बंगाल का ‘तुष्टिकरण’ करने की पूरी कोशिश की गई और दुर्गा विसर्जन के दिनों तक को बदल दिया गया था। उन्होंने दावा किया कि यह प्रवृत्ति भी उसी पुरानी सोच की अगली कड़ी थी जिसमें राजनीतिक फायदे के लिए परंपराओं से समझौता किया गया।
रिपोर्ट: शिंकी सिंह, कोलकाता

