Rashtra Bharat Logo

राहुल गांधी ने मोदी पर लगाए 2020 चीन झड़प में सेना को अकेला छोड़ने के आरोप

राहुल गांधी ने मोदी पर लगाए 2020 चीन झड़प में सेना को अकेला छोड़ने के आरोप
Rahul Gandhi Modi 2020 China Clash: सेना प्रमुख की किताब से खुलासे, संसद में हंगामा (Image Source: Screengrab - X/@RahulGandhi)

Rahul Gandhi Modi China Clash 2020: राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब के हवाले से प्रधानमंत्री मोदी पर आरोप लगाया कि 2020 में चीनी टैंकों से निपटने के लिए सेना को अकेला छोड़ दिया गया। सरकार ने इसे सेना को अधिकार देना बताया। राहुल के सिख मंत्री वाले बयान पर भी विवाद हुआ।

Updated:
·by
Asfi Shadab
Asfi Shadab
Share:

विषयसूची

देश की राजनीति में एक बार फिर 2020 में हुई भारत-चीन सीमा झड़प का मुद्दा गरमा गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संसद में पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब के अंशों का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राहुल का कहना है कि चीनी सेना के टैंकों से निपटने के लिए मोदी सरकार ने भारतीय सेना को अकेला छोड़ दिया था।

यह विवाद तब और बढ़ गया जब राहुल गांधी ने एक सिख मंत्री को ‘गद्दार दोस्त’ कह दिया, जिसके बाद सिख समुदाय के नेताओं ने इसकी कड़ी आलोचना की। सरकारी पक्ष का कहना है कि यह सेना को अधिकार देने की नीति थी जो बिना किसी बड़े संघर्ष के सफल रही।

 

किताब में क्या लिखा है

द कारवां पत्रिका में प्रकाशित जनरल नरवणे की किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ के अंशों के अनुसार, कैलाश रिज पर चीनी टैंकों की मौजूदगी के बीच सेना प्रमुख ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को फोन किया था। जनरल को जवाब मिला कि प्रधानमंत्री का निर्देश है कि ‘आप जो सही समझें वही करें’। नो-फायर ऑर्डर के बीच यह जवाब सुनकर जनरल ने खुद को अकेला महसूस किया।

किताब में सेना प्रमुख ने उस दौर की कठिन परिस्थितियों का जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है कि जब चीनी सेना ने अचानक कैलाश रिज पर कब्जा करने की कोशिश की, तब भारतीय सेना को तुरंत फैसला लेना पड़ा। लेकिन सरकार से स्पष्ट दिशा-निर्देश न मिलने से स्थिति और मुश्किल हो गई।

राहुल गांधी के आरोप

राहुल गांधी ने संसद में इस किताब के अंशों को लहराते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने सेना प्रमुख को चीनी टैंकों से अकेले निपटने के लिए कह दिया। उनका आरोप है कि ऐसे नाजुक समय में सरकार को साफ निर्देश देना चाहिए था, लेकिन जिम्मेदारी टाली गई।

कांग्रेस नेता का कहना है कि यह देश की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है। सरकार ने सेना के साहस का फायदा उठाया लेकिन खुद कोई जिम्मेदारी नहीं ली। राहुल ने सवाल उठाया कि अगर कुछ गलत हो जाता तो जवाबदेही किसकी होती।

आज अगर प्रधानमंत्री संसद में आते हैं, तो मैं उन्हें एक किताब भेंट करूंगा।

यह किताब किसी विपक्षी नेता की नहीं है।
यह किताब किसी विदेशी लेखक की नहीं है।
यह किताब है देश के पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की – और हैरानी की बात यह है कि यह किताब कैबिनेट मंत्रियों के हिसाब से मौजूद ही…

सरकार का जवाब

सरकारी पक्ष ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि सेना को अधिकार देना ही असली नेतृत्व है। मोदी सरकार ने सेना पर भरोसा किया और उसे जमीनी स्तर पर फैसला लेने की आजादी दी।

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि यह रणनीति सफल रही। भारतीय सेना ने बिना गोली चलाए चीनी सेना को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। किसी बड़े संघर्ष को टाला गया और भारत की जीत हुई। यह प्रधानमंत्री की सोची-समझी रणनीति का नतीजा था।

सिख समुदाय से विवाद

इस बहस के बीच राहुल गांधी ने एक सिख मंत्री को ‘गद्दार दोस्त’ कह दिया। यह टिप्पणी संसद में हुई गर्मागर्म बहस के दौरान आई। इसके बाद सिख समुदाय के कई नेताओं ने राहुल की आलोचना की।

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और अन्य सिख संगठनों ने इस बयान को समुदाय का अपमान बताया। उन्होंने राहुल से माफी की मांग की है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं आईं।

2020 की चीन झड़प की पृष्ठभूमि

साल 2020 में लद्दाख के गलवान घाटी में भारत और चीन की सेनाओं के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इसमें 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे। यह घटना आजादी के बाद से सबसे बड़ी सीमा झड़पों में से एक थी।

उसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया। कई दौर की बातचीत के बाद धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हुई। लेकिन सीमा पर तनाव आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने तैनात हैं।

विपक्ष की मांग

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस मामले की संसदीय समिति से जांच की मांग की है। उनका कहना है कि सेना प्रमुख की किताब में जो खुलासे हुए हैं, उन पर देश को सच जानने का अधिकार है।

विपक्ष चाहता है कि प्रधानमंत्री संसद में इस मामले पर बयान दें। सरकार को साफ करना चाहिए कि उस वक्त क्या निर्णय लिए गए और क्यों। लेकिन सरकार ने अभी तक इस मांग को नहीं माना है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा

यह मुद्दा अब राजनीतिक गलियारों में गर्म बहस का विषय बन गया है। आगामी चुनावों को देखते हुए यह मामला और उछल सकता है। विपक्ष इसे सरकार पर हमले के हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर सकता है।

दूसरी तरफ सरकार इसे विपक्ष की नकारात्मक राजनीति बता रही है। बीजेपी का कहना है कि राहुल गांधी सेना के मनोबल को गिराने की कोशिश कर रहे हैं। वे देश की सुरक्षा को राजनीति का मुद्दा बना रहे हैं।

सेना और राजनीति का रिश्ता

यह पहली बार नहीं है जब सेना से जुड़ा कोई मामला राजनीतिक बहस का हिस्सा बना हो। पहले भी कई बार सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट हमले जैसे मुद्दों पर राजनीतिक दल आमने-सामने आए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि सेना को राजनीति से दूर रखना चाहिए। लेकिन जब पूर्व सेना प्रमुख की किताब में ऐसे खुलासे होते हैं तो बहस होना स्वाभाविक है। सवाल यह है कि इस बहस को किस तरह से आगे बढ़ाया जाए।

जनता की प्रतिक्रिया

आम लोगों में इस मुद्दे को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया है। कुछ लोगों का मानना है कि सरकार को पारदर्शिता दिखानी चाहिए। वहीं कुछ का कहना है कि सुरक्षा के मामलों पर सार्वजनिक बहस ठीक नहीं।

सोशल मीडिया पर यह मुद्दा ट्रेंड कर रहा है। लोग अपनी-अपनी राय रख रहे हैं। कुछ राहुल गांधी के सवालों को सही बता रहे हैं तो कुछ सरकार का समर्थन कर रहे हैं।

आगे की राह

यह विवाद अभी थमने के आसार नहीं दिख रहे। आने वाले दिनों में संसद में और भी तीखी बहस हो सकती है। विपक्ष इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाता रहेगा।

सरकार को इस मामले में साफ रुख अपनाना होगा। अगर किताब में लिखी बातें सही हैं तो उनका जवाब देना जरूरी है। वहीं अगर ये आरोप गलत हैं तो सरकार को सबूतों के साथ अपनी बात रखनी होगी। देश की जनता सच जानना चाहती है और उसे यह अधिकार मिलना भी चाहिए।

Rashtra Bharat
Rashtra Bharat पर पढ़ें ताज़ा खेल, राजनीति, विश्व, मनोरंजन, धर्म और बिज़नेस की अपडेटेड हिंदी खबरें।
Asfi Shadab

Asfi Shadab

असफ़ी शादाब राष्ट्र भारत में कंटेंट एडिटर और न्यूज़ राइटर हैं। वे क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं, खेल, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय घटनाओं से संबंधित समाचारों का संपादन, तथ्य सत्यापन और प्रकाशन कार्य संभालते हैं। उनकी जिम्मेदारी विभिन्न राज्यों से प्राप्त समाचारों को आधिकारिक स्रोतों, उपलब्ध दस्तावेजों और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर व्यवस्थित एवं स्पष्ट रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। राष्ट्र भारत में वे महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों से प्राप्त समाचारों का संपादन करते हैं तथा उन्हें सरल, सटीक और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करने का कार्य करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रकाशित सामग्री संपादकीय मानकों, तथ्यात्मक शुद्धता और विश्वसनीय स्रोतों के अनुरूप हो। मुख्य कार्यक्षेत्र (Core Responsibilities): क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं और समसामयिक समाचारों का संपादन। विभिन्न संवाददाताओं और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से प्राप्त सामग्री का तथ्य सत्यापन। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी दस्तावेजों एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचारों का संपादन। स्पष्ट, संतुलित और पाठक-अनुकूल भाषा में समाचार प्रस्तुत करना। राष्ट्र भारत की संपादकीय नीतियों और पत्रकारिता मानकों के अनुरूप सामग्री प्रकाशित करना। संपादकीय दृष्टिकोण (Editorial Approach): असफ़ी शादाब का उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, संतुलित और स्पष्ट समाचार पहुंचाना है। वे प्रकाशित होने वाली प्रत्येक सामग्री की भाषा, संदर्भ और उपलब्ध स्रोतों की समीक्षा करते हैं ताकि समाचार संपादकीय गुणवत्ता और विश्वसनीयता के मानकों पर खरा उतर सके।