Rashtra Bharat Logo

UGC Rules 2026: शिक्षा संस्थानों में समानता समिति बनाने की सिफारिश पर राजनीतिक बवाल, जानें किसने दी मंजूरी

UGC Rules 2026: शिक्षा संस्थानों में समानता समिति बनाने की सिफारिश पर राजनीतिक बवाल, जानें किसने दी मंजूरी
UGC Rules 2026: शिक्षा संस्थानों में समानता समिति गठन पर राजनीतिक घमासान (File Photo)

UGC ने शिक्षा संस्थानों में इक्विटी कमेटी बनाने का नियम जारी किया है। यह कमेटी SC/ST/OBC के साथ भेदभाव की शिकायतें सुनेगी। दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने यह सिफारिश की, जिसमें 30 सदस्यों में 16 भाजपा के हैं। सवर्ण समाज इसका विरोध कर रहा है। राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

Updated:
·by
Asfi Shadab
Asfi Shadab
Share:

विषयसूची

UGC Rules 2026: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC ने हाल ही में एक बड़ा फैसला लिया है जो देश भर की शिक्षा व्यवस्था में एक नया मोड़ ला सकता है। इस फैसले के तहत देश के सभी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों को अपने यहां एक विशेष समिति बनानी होगी। इस समिति का नाम इक्विटी कमेटी रखा गया है। इस कमेटी का मुख्य काम अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के साथ होने वाले भेदभाव की शिकायतें सुनना और उन्हें सुलझाना होगा।

यह नियम देश भर में एक बड़ी बहस का विषय बन गया है। कुछ लोग इसे सामाजिक न्याय की दिशा में एक सकारात्मक कदम मान रहे हैं तो कुछ इसका विरोध कर रहे हैं। खासतौर पर सवर्ण समाज के कुछ हिस्सों में इस नियम को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। लेकिन जो बात सबसे अधिक ध्यान खींचती है वह यह है कि जिस संसदीय समिति ने इस नियम की सिफारिश की है, उसमें बड़ी संख्या में भाजपा के सांसद शामिल हैं।

संसदीय समिति ने की थी सिफारिश

यह सिफारिश संसद की स्थाई समिति ने की है जो शिक्षा, महिला, बच्चों, युवा और खेल मामलों पर काम करती है। इस समिति के अध्यक्ष कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह हैं। लेकिन समिति में सदस्यों की संख्या देखें तो तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आती है।

इस समिति में कुल 30 सदस्य हैं। इनमें से 21 लोकसभा के सांसद हैं और 9 राज्यसभा के सांसद हैं। दलगत संख्या के हिसाब से देखें तो इस समिति में भाजपा के 16 सांसद हैं, जो पूरी समिति का आधे से अधिक हिस्सा है। कांग्रेस के 4 सांसद, समाजवादी पार्टी के 3, तृणमूल कांग्रेस के 2, सीपीएम का 1, डीएमके का 1, एनसीपी के दोनों गुटों से 1-1 और आम आदमी पार्टी की 1 पूर्व सदस्य इस समिति में शामिल हैं।

राज्यसभा से कौन-कौन हैं सदस्य

राज्यसभा से इस समिति में शामिल सदस्यों में कई बड़े नाम हैं। दिग्विजय सिंह के अलावा बिहार से भाजपा नेता भीम सिंह, पश्चिम बंगाल से सीपीएम नेता बिकास रंजन भट्टाचार्य, राजस्थान से भाजपा नेता घनश्याम तिवाड़ी, हरियाणा से भाजपा नेता और महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रेखा शर्मा शामिल हैं।

इसके अलावा केरल भाजपा के उपाध्यक्ष सी. सदानंदन मास्टर, हिमाचल प्रदेश से भाजपा नेता सिकंदर कुमार, महाराष्ट्र से एनसीपी नेता और अजीत पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार और दिल्ली से आम आदमी पार्टी की पूर्व नेता स्वाती मालीवाल भी इस समिति में शामिल हैं।

लोकसभा से आए ये बड़े चेहरे

लोकसभा से इस समिति में शामिल सदस्यों की सूची भी काफी लंबी है। इनमें कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व जज और भाजपा नेता अभिजित गंगोपाध्याय, पूर्व केंद्रीय मंत्री और पटना साहिब से सांसद रविशंकर प्रसाद, भाजपा के प्रवक्ता और पुरी से सांसद संबित पात्रा जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

नई दिल्ली से भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज, एनसीपी शरद पवार गुट के अमर शरदराव काले, मणिपुर से कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोईजाम, छत्तीसगढ़ से भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल, आंध्र प्रदेश में भाजपा की कद्दावर नेता दग्गुबाती पूरनदेश्वरी और मध्य प्रदेश से दर्शन सिंह चौधरी भी इस समिति के सदस्य हैं।

अन्य दलों के प्रतिनिधि

समिति में अन्य दलों के प्रतिनिधियों में केरल से कांग्रेस नेता डीएन कुरियाकोसे, मुंबई से कांग्रेस नेता वर्षा एकनाथ गायकवाड़, गुजरात से भाजपा नेता हेमांग जोशी शामिल हैं। समाजवादी पार्टी से इटावा के जितेंद्र कुमार दोहरे, संभल के जियाउर्रहमान बर्क और घोसी के राजीव राय सदस्य हैं।

तृणमूल कांग्रेस से झारग्राम की कालिपाड़ा सरेन खेरवाल और पूर्व अभिनेत्री व हुगली की सांसद रचना बनर्जी भी इस समिति में हैं। असम से भाजपा के कामाख्या प्रसाद तासा, उत्तर प्रदेश से करण भूषण सिंह, गुजरात से शोभनाबेन महेंद्रसिंह बरैया और तमिलनाडु से डीएमके नेता थमिझाची थंगापांडियन भी इस समिति के सदस्य हैं।

समिति की संरचना क्या कहती है

इस समिति की संरचना पर गौर करें तो यह साफ होता है कि इसमें सत्ताधारी भाजपा के सदस्यों की संख्या 50 फीसदी से अधिक है। यानी कुल 30 सदस्यों में से 16 भाजपा के हैं। इसका मतलब यह है कि बिना भाजपा के सदस्यों की सहमति के इस समिति में कोई भी बड़ा फैसला नहीं हो सकता था।

यही कारण है कि जब इस नियम का विरोध हो रहा है तो सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इस सिफारिश को मंजूरी किसने दी। क्या यह केवल दिग्विजय सिंह का फैसला था या फिर समिति के सभी सदस्यों ने इस पर सहमति जताई थी।

क्या है इक्विटी कमेटी का उद्देश्य

UGC के नए नियम के मुताबिक हर शिक्षण संस्थान में बनने वाली इक्विटी कमेटी का मुख्य उद्देश्य सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना है। इस कमेटी को SC, ST और OBC वर्ग के लोगों के साथ होने वाले किसी भी तरह के भेदभाव की शिकायतें सुननी होंगी और तय समय सीमा में उनका समाधान करना होगा।

इस कमेटी के गठन का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षा संस्थानों में सभी को समान अवसर मिलें और किसी के साथ जाति के आधार पर कोई भेदभाव न हो। यह कदम सामाजिक समानता की दिशा में एक प्रयास माना जा रहा है।

विरोध क्यों हो रहा है

UGC Rules 2026: हालांकि इस नियम का विरोध भी हो रहा है। कुछ लोगों का मानना है कि यह कदम समाज में एक नई तरह की विभाजन रेखा खींच सकता है। सवर्ण समाज के कुछ हिस्से इसे अपने खिलाफ एक कदम मान रहे हैं। उनका तर्क है कि यह व्यवस्था पहले से ही मौजूद शिकायत निवारण तंत्र को कमजोर कर सकती है।

दूसरी तरफ इस नियम के समर्थकों का कहना है कि शिक्षा संस्थानों में आज भी जाति के आधार पर भेदभाव होता है। उनके मुताबिक एक विशेष समिति का गठन इस समस्या के समाधान में मददगार साबित हो सकता है।

राजनीतिक संदर्भ

इस पूरे मामले में राजनीतिक पहलू भी महत्वपूर्ण है। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली समिति में भाजपा के बहुमत के कारण यह सवाल उठ रहा है कि इस फैसले की जिम्मेदारी किस पर है। क्या यह केवल विपक्ष का फैसला है या सत्ता पक्ष ने भी इसे समर्थन दिया था।

यह मामला आने वाले समय में राजनीतिक बहस का विषय बन सकता है। खासतौर पर जब देश में सामाजिक न्याय और आरक्षण जैसे मुद्दे पहले से ही गर्म हैं।

Rashtra Bharat
Rashtra Bharat पर पढ़ें ताज़ा खेल, राजनीति, विश्व, मनोरंजन, धर्म और बिज़नेस की अपडेटेड हिंदी खबरें।
Asfi Shadab

Asfi Shadab

असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।