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Bihar Chunav 2025: करगहर में महागठबंधन में दरार, दो प्रत्याशियों के उतरने से वोटों का बिखराव तय

Bihar Chunav 2025: करगहर में महागठबंधन में दरार, दो प्रत्याशियों के उतरने से वोटों का बिखराव तय
Mahagathbandhan Vote Split – करगहर में दो प्रत्याशी के उतरने से महागठबंधन के वोटों में बिखराव के आसार (file photo)
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Asfi Shadab
Asfi Shadab
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करगहर में महागठबंधन में दरार, दो प्रत्याशियों के उतरने से वोटों का बिखराव तय

करगहर (रोहतास)। बिहार के रोहतास ज़िले की करगहर विधानसभा क्षेत्र में इस बार का चुनावी माहौल खासा दिलचस्प हो गया है। महागठबंधन में एकता की बात करने वाले नेता अब अंदरूनी मतभेदों से जूझते दिख रहे हैं। कांग्रेस और सीपीआई (एमएल) दोनों ने अपने-अपने प्रत्याशी उतार दिए हैं, जिससे महागठबंधन के मतों में बिखराव तय माना जा रहा है।


महागठबंधन की एकता पर सवाल

सोमवार को नामांकन के अंतिम दिन कांग्रेस के निवर्तमान विधायक संतोष कुमार मिश्रा और सीपीआई (एमएल) के महेंद्र प्रसाद गुप्ता ने अपने-अपने नामांकन दाखिल किए। दोनों दलों का एक ही गठबंधन में शामिल होना और फिर भी अलग-अलग प्रत्याशी उतारना यह संकेत देता है कि महागठबंधन की जमीनी स्थिति उतनी मजबूत नहीं है जितनी ऊपर से दिखाई देती है।

सीपीआई (एमएल) प्रत्याशी महेंद्र प्रसाद गुप्ता का कहना है कि उन्हें पार्टी द्वारा उच्च नेतृत्व की स्वीकृति के बाद ही सिंबल प्रदान किया गया है। उन्होंने दावा किया कि वे वर्षों से क्षेत्र की जनसमस्याओं को उठाते रहे हैं और इस बार जनता के बीच सीधे संघर्ष के माध्यम से अपनी बात रखने को तैयार हैं।


त्रिकोणीय मुकाबले के संकेत

सीपीआई (एमएल) के चुनावी मैदान में आने से करगहर विधानसभा क्षेत्र में मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। अब समीकरण केवल महागठबंधन बनाम राजग तक सीमित नहीं रह गए हैं। जन सुराज पार्टी और बसपा भी चुनावी दौड़ में हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह बिखराव महागठबंधन के पारंपरिक वोट बैंक को प्रभावित कर सकता है।

महागठबंधन के समर्थक अब असमंजस में हैं कि आखिर किस प्रत्याशी को मत दें। दोनों उम्मीदवार तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाने की बात कर रहे हैं, जिससे भ्रम की स्थिति और गहरी हो रही है।


2015 का अनुभव और जातीय गणित

गौरतलब है कि सीपीआई (एमएल) के महेंद्र प्रसाद गुप्ता वर्ष 2015 में भी चुनावी मैदान में उतरे थे, जहां उन्हें लगभग 1500 मत मिले थे। वे वैश्य समाज से आते हैं और करगहर क्षेत्र के ही मूल निवासी हैं। इस बार भी उनके मैदान में उतरने से न केवल महागठबंधन के वोटों का विभाजन होगा, बल्कि राजग को भी आंशिक नुकसान हो सकता है क्योंकि भाजपा का पारंपरिक मतदाता वर्ग भी वैश्य समाज से जुड़ा हुआ है।


जन सुराज पार्टी और नए समीकरण

सासाराम में जन सुराज पार्टी ने विनय कुमार सिंह को प्रत्याशी बनाया है, जिससे करगहर में इस पार्टी के प्रत्याशी रितेश रंजन पांडेय को भी अप्रत्यक्ष रूप से मजबूती मिल सकती है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि राजपूत समाज जन सुराज पार्टी के पक्ष में गोलबंद होता दिख रहा है। क्षेत्र में ब्राह्मण प्रत्याशियों की अनुपस्थिति से भी समीकरण नए सिरे से बनते नज़र आ रहे हैं।


मतदाताओं की चुप्पी और राजनीतिक अनिश्चितता

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस बार का चुनाव जातीय और पारंपरिक समीकरणों से आगे बढ़कर प्रत्याशियों के व्यक्तित्व और क्षेत्रीय कार्यों पर निर्भर करेगा। मतदाता खुलकर अपने झुकाव का इज़हार नहीं कर रहे हैं। अधिकांश लोग ‘चुप्पी साधे मतदाता’ की भूमिका में हैं, जिससे अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है कि किस ओर हवा बहेगी।


पांच मुख्य दलीय उम्मीदवारों में रोचक टक्कर

करगहर विधानसभा से इस बार पाँच प्रमुख प्रत्याशी मैदान में हैं —

  1. जन सुराज पार्टी: रितेश रंजन पांडेय

  2. जदयू: वशिष्ठ सिंह

  3. कांग्रेस: संतोष कुमार मिश्रा

  4. बसपा: उदय प्रताप सिंह

  5. सीपीआई (एमएल): महेंद्र प्रसाद गुप्ता

नामांकन की जांच (स्क्रूटनी) के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि कौन-कौन अंतिम रूप से चुनावी रणभूमि में रहेगा। लेकिन अभी से ही यह तय माना जा रहा है कि करगहर का चुनावी मुकाबला इस बार बेहद रोचक और अप्रत्याशित रहेगा।

करगहर विधानसभा क्षेत्र का यह चुनाव इस बार महागठबंधन के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। दो प्रत्याशियों के उतरने से वोटों का बिखराव लगभग तय है। यदि ऐसा हुआ, तो इसका लाभ अन्य दलों, खासकर जन सुराज पार्टी और राजग को मिल सकता है। राजनीतिक समीकरणों में यह दरार आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति को नया मोड़ दे सकती है।

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Asfi Shadab

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।